नारदा केस में सामने आया टीएमसी के दो मंत्रियों का नाम, ED ने दायर की चार्जशीट, जानिए क्या है मसला।

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नारदा केस में ED ने दायर की चार्जशीट टीएमसी के दो नेताओं का नाम शामिल फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी का नाम आया सामने पूर्व मेयर से लेकर आईपीएस अधिकारी तक का नाम शामिल पीएमएलए अदालत में है मामला विपक्ष नेता के घेरे में टीएमसी पार्टी।

पश्चिम बंगाल के नारदा केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चार्जशीट दायर कर दी है। आपको बता दे चार्जशीट में ममता सरकार के दो मंत्रियों का नाम सामने आया जिसमें फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी का नाम शामिल है। जो आधिकारिक तौर से टीएमसी पार्टी के मेंबर है। प्रवर्तन निदेशालय ( ED) ने कोलकाता में पीएमएलए अदालत में चार्जशीट दायर की है। उपरोक्त के आधार पर समझे क्या है मामला।

नारदा केस को लेकर ईडी ने दायर की चार्जसीट।

खबरों के मुताबिक, ईडी ने कोलकाता की विशेष पीएमएलए कोर्ट के सामने परिवहन और आवास मंत्री और टीएमसी नेता फिरहाद हाकिम और सुब्रत मुखर्जी के खिलाफ याचिका दायर कि है आपको बता दें, इसमें मामले कोलकाता के पूर्व मेयर सोवन चटर्जी और आईपीएस अधिकारी एस.एम.एच. मिर्जा का नाम भी शामिल हैं, और इनके खिलाफ़ भी आरोप पत्र दाखिल किया। ईडी ने अदालत से मनी लॉन्ड्रिंग केस के इन तमाम आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील कि हैं।

नारदा स्टिंग केस से लेकर ममता बनर्जी के रुख तक जानिए क्या हैं, पूरा मामला ।

नारदा केस यानी नारदा स्टिंग का मामला आज का नही है, आपको बता दें यह मामला बीते साल विधानसभा चुनावों के दौरान का है, नारद न्यूज़ के सीईओ मैथ्यू सैमुएल ने एक स्टिंग वीडियो जारी कर बंगाल की राजनीति में पूरी तरह से हलचल मचा दी थी। आपको बता दें, इस वीडियो में वे एक कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर तृणमूल कांग्रेस के सांसदों, मंत्रियों और कोलकाता नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी को काम कराने के एवज़ में रिशवत देते नज़र आ रहे थे।

जहां इस मामले को लेकर एक तरफ़ विपक्ष लगातार ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को निशाना बना रही। तो वही टीएमसी नेता और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसे साज़िश करार देती रही। और उन्होंने इसे झूठ व आरोप मात्र करार बताया कहा ये उनके और उनकी पार्टी के खिलाफ साजिश है। इन आरोपी में सचाई नही हैं।


आपको बता दें, नारदा स्टिंग मामला को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2017 में स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। हालांकि, इस स्टिंग में सिर्फ इन दो नेताओं के नाम सामने नहीं आए थे, बल्कि कई ऐसे नेताओं के भी नाम सामने आए थे, जो अब आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं. जिनका टीएमसी पार्टी से अब आधिकारिक तौर पर कोई संबंध नहीं रहा।

ममता बनर्जी ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख

आपको बता दें, टीएमसी नेता व पश्चिम बंगाल कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नारदा केस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कोलकाता हाई कोर्ट ने उन्हें हलफनामा दायर करने से मना किया था, जिसके बाद सीएम ममता ने यह फैसला किया। खबरों के अनुसार ममता बनर्जी ने, टीमसी नेताओं की गिरफ्तारी पर वह खुद सीबीआई दफ्तर पहुंच गई थीं।

विपक्ष ने बनाया मुद्दा, फिर भी कब्जित रही ममता की गद्दी।

नारद स्टिंग मसला पर विपक्ष ने ममता और टीएमसी नेता को निशाने पर रखा चुनाव के दौरान उन्होंने इसे मुद्दा बनाया और लगातार निशाना साधे रहा, ये अलग बात है कि इससे टीएमसी और ममता बनर्जी की छवि पर कुछ असर नहीं दिखा। यकीनन, विपक्ष ने चुनावों में इसे बड़ा मुद्दा बनाया था।बावजूद इसके तृणमूल कांग्रेस को भारी कामयाबी मिली थी। और ममता बनर्जी ने जीत हासिल की।

क्या होगा असर।

राजनीति में राजनीतिक पार्टी और नेताओं की छवि बहुत महत्व रखती हैं। ये मामला सामने आने से टीएमसी पार्टी की छवि और जनता की विश्वसनीयता पर असर पढ़ सकता है। अभी बीते दिनों ही ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री की शपथ ली है जनता ने एक बार फिर भरोसा कर मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्हें सौपी है और ऐसे में अगर पार्टी मेंबर का नाम स्टिंग मामला में आता है तो निश्चित तौर पर इसका असर पार्टी की विश्वसनीयता पर पड़ेगा। अभी तक तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चार्जसीट दायर की है, अभी भी मामले पर फ़ैसला बाकी हैं। क्या यह सिर्फ आरोप है कि नहीं ये आने वाले वक्त में ही पता चलेगा।

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