तालिबानियों के पक्ष में धीरे – धीरे आ रहा एक खास समुदाय, अब मुनव्वर राणा बोले तालिबानी बुरे लोग नही, और महर्षि वाल्मीकि की तुलना आतंकी तालिबानियों से कर डाली।

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लगातार सरकार के खिलाफ बोलने वाले और गलत बयानबाजी करने वाले शायर मुनव्वर राणा एक बार भी जहर उगला है, कहां की वहां पर तालिबानी गलत नही है हालत की वजह से वो ऐसे हो गए है। और कहां उनपर भरोसा किया जा सकता है, बस यही नहीं भारत की तुलना भी तालिबानियों से कर डाली बोला वहां जैसी क्रूरता वहा पर हो रही उससे ज्यादा तो भारत में होती है, और तो और हम दंगे करवाने में विश्व गुरु है। लगातार भारत में भी ताबिलानियों के प्रशंसकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ. शफीकुर्रहामान बर्क, आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री मौसाना मसूद मदनी के बाद अब मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने भी तालिबानी आतंकियों का समर्थन किया है।

मुन्नवर राणा ने बेहद घटिया मानसिकता का प्रदर्शन किया है जिसने एक आतंकी संगठन को सही ठहराते हुए हिंदू आस्था को भी ठेस पहुंचाया है। बोला तालिबानी कोई गलत नही है बस उन्होंने अपने देश अपने मुल्क को आजाद कराया है, उन लोगो ने कुछ गलत नही किया है बस अपने देश के लिए लड़ रहे उन्होंने, अफगानिस्तान के हालात को भारत से बेहतर बताया। राना ने तालिबान की तुलना RSS, BJP और बजरंग दल से की। उनके बयान पर अब विवाद शुरू हो गया है।

भगवान महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबानी आतंकियों से की।

एक न्यूज चैनल में चर्चा के दौरान कहा, तालिबान आतंकी है जितने रामायण लिखने वाले महर्षि वाल्मीकि अगर वाल्‍मीकी रामायण ‘लिख देता है’ तो वह देवता ‘हो जाता है’, उससे पहले वह डाकू होता है। इसको क्‍या कीजिएगा। आदमी का किरदार, उसका कैरेक्‍टर बदलता रहता है। लेकिन जब वही पत्रकार ने आपत्ति जताई की आपको भगवान के बारे में ऐसा नहीं बोलना चाहिए तो राणा ने बोला आपके मजहब (हिंदू धर्म) में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है। लेकिन, वो एक लेखक थे। ये ठीक है कि उन्‍होंने एक बड़ा काम किया। उन्‍होंने रामायण लिखी। हालांकि, यहां मुकाबला करने की बात नहीं है।

यही ना रुके राणा ने आगे बीजेपी और आरएसएस और बजरंजदल को भी तालिबान से तुलना किया। और कहा अफगानिस्तान से ज्यादा क्रूरता भारत में होती है यहां लोगो को आपस में लड़ाया जाता है दंगे कराए जाते है। राणा कहते है ये अफगानिस्तान और तालिबान का आपसी मामला है, और ऐसा भी समय आएगा जब तालिबान हुकूमत भारत से मदद मांगेगी और भारत मदद भी करेगा, और कहते है की भारत में तो तालिबानियों से भी ज्यादा हथियार तो भारत के लोगो के पास है, तालिबानी तो हथियार छीनते है, हमारे यहां माफिया ख़रीद लेते है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता ने तालिबानियों का किया समर्थन।

18 अगस्त को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नोमानी ने एक वीडियो मैसेज जारी किया था। इसमें उन्होंने तालिबानियों को अफगानिस्तान में हुकूमत कायम करने की बधाई दी थी और कहा था कि गरीब और निहत्थी कौम ने दुनिया की सबसे मजबूत फौज को शिकस्त दी, आपकी हिम्मत को सलाम।

उन्होंने कहा था कि 15 अगस्त 2021 की तारीख इतिहास बन गई। अफगानिस्तान की सरजमीं पर एक निहत्थी और गरीब कौम, जिसके पास न साइंस, न टेक्नोलॉजी, न दौलत, न हथियार और न तादाद थी, उसने पूरी दुनिया की सबसे ज्यादा मजबूत फौजों को शिकस्त दी और काबुल के सरकारी महल में वो दाखिल हो गए।

समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने तालिबान का समर्थन किया।

सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने तालिबान का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने देश को यानी अफगानिस्तान को आजाद कराया है। तालिबान ने अफगानिस्तान में अमेरिका और रूस के भी पैर नहीं जमने दिए हैं। तालिबान की अगुवाई में अफगानी लोग अमेरिका से आजादी चाहते हैं जिस तरह से भारत में भी अंग्रेजों से आजादी के लिए पूरे देश ने मिलकर लड़ाई लड़ी थी, इसी प्रकार तालिबान ने भी मिलकर अपने देश को आजाद कराया है। ऐसा बयान देने पर अब उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश में देशद्रोह का केस भी दर्ज हो गया है।

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