अफ़ग़ान महिलाओं ने तालिबान के खिलाफ किया प्रदर्शन, जानिए क्या है उनकी मांग।

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अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल में बीते शुक्रवार अफगानी महिलाओं ने तालिबान हुकूमत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर बुलंद आवाज से अपने हक़ की मांग की। फ़ग़ान महिलाओं ने ऐसे कैबिनेट की मांग की जिसमे महिलाओं की भी भागीदारी हो। ये कहना गलत नहीं होगा की एक औरत अन्य महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय उनके साथ हो रहे जुर्म को समझ सके. यहीं वजह है कि अफ़ग़ान महिलाएं लगातार यही मांग कर रही है की अफ़ग़ान में ऐसी कैबिनेट का गठन हो जहां महिलाएं भी हो। महिलाओं ने ये तक कहा की वह बुर्का पहनने तक को तैयार है लेकिन उनकी बच्चियों को पढ़ने के लिय स्कूल जाने की अनुमति दे तालिबान हुकूमत। शांति से अपनी मांग कर रही अफ़ग़ान महिलाओं पर तालिबान ने हिंसा की छड़ी लगा दी। ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए है जिससे ये साफ़ है की अफ़ग़ान में महिलाओं की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। अफ़ग़ान में तालिबान के कब्ज़े के बाद विश्व भर में अफ़गानी महिलाओं के प्रति चिंता वयक्त की जा रही है।

तालिबान की हुकूमत में महिलाओं की स्वतंत्रता का दावा, जानिए दावों में कितना सच।

जैसा की हम सब जानते है अफ़ग़ान की राजधानी काबुल पर तालिबान द्वारा कब्ज़ा किया जा चुका है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ आपको बता दें, 1990 के दशक के अंत में देश पर यही तालिबान राज कर रहा था और अब एक बार फिर से उसने कब्जा कर लिया है। सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले के बाद वॉशिंगटन ने आतंकी ओसामा बिन लादेन और उसे शरण देने वाले तालिबान को तहस-नहस कर सत्ता से हटा दिया था। लेकिन अब एक बार फिर अफ़ग़ान की राजधानी काबुल पर तालिबानी फरमान ने कब्जा कर सत्ता अपने अधीन कर लिया। और अब उसने अपने आतंकी ढंग से काबुल की भाग दौड़ संभाल ली है। काबुल में इस वक्त हर तरफ खौफ का मंजर है। हर तरफ सिर्फ दहशत का माहौल। काबुल में अगर इस वक्त कोई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है तो वो है महिलाएं और बच्चे। काबुल में कब्ज़ा करने के बाद जो तस्वीरे सबसे पहले सामने आई थी वो थी महिलाओं की तस्वीरों पर रंगो से पुताई ये महज़ सिर्फ तस्वीरें नहीं ये काबुल में महिलाओं की मौजूदा स्थिति को दिखता है जहां एक तरफ़ तालिबान महिलाओं की स्वतंत्रता व उनके अधिकारों की सुरक्षा का दावा कर रहा हैं तो वहीं दूसरी तरफ वहा से आ रही तस्वीरों से साफ है कि तालिबान के दावों में तनिक भर भी सच नहीं है।

कल शायद मेरी हत्या कर दी जाए।

बीते दिनों एक वीडियो बहुत वायरल हुआ जहां एक अफ़गानी महिला ने एक अंग्रेजी न्यूज़ चैनल में कहा की मुझे ऐसा लग रहा की शायद कल मेरी हत्या कर दी जाए, मेरी ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गई है। मैं हर रोज़ डर के मोहौल में रह रही हूं मैने सब कुछ खो दिया हैं।
ये एक अफ़गान महिला की आपबीती है जिसने सब कुछ खो दिया। सवाल यही है की ऐसे तालिबानी हुकूमत पर कैसे भरोसा किया जाए ? कैसे कोई ऐसे देश की व्यवस्था पर भरोसा करे जहां पर एक मां अपनी दूध पीती बच्ची को अमेरिकी सैन्य अधिकारी के हाथों में दे देती है क्योंकि वह औरत अपनी बच्ची को अपने ही देश में अब सुरक्षित महसूस नही करती। कैसे महिलाओं को बुर्के में देख कर उन्हे वहा सुरक्षित वा स्वतंत्र समझा जा सकता है ? कैसे सीरिया लॉ के तहत महिलाओं की आजादी का पर्याय माना जा सकता है। कैसे ऐसे देश पर भरोसा किया जा सकता है जहां पर महिलाओं को उनकी आज़ादी उनको उनकी हद बता कर दी गई. जब हद बता आज़ादी दी जाए तो वह आज़ादी नहीं रह जाती। सवाल अभी यहीं है, क्या वाकई अफ़गानी महिलाएं सुरक्षित हैं ?
ऐसी तस्वीरें देख कर अगर तालिबान दावा कर की इस नए तालिबान में महिलाओं को पूरी स्वतंत्रता दी गई और हमसे इस बात पर यकीन करने को कहे तो ये बिलकुल “आंख हो कर भी अंधे होने जैसा होगा”

महिलाओं को सिर्फ उम्मीद का सहारा।

इसमें कोई संदेह नहीं है की अफ़ग़ान में महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है।और लगातार उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है। लेकिन एक बात जो यकीनन सराहनीय है वो है अफ़ग़ान महिलाओं का अपने हक़ के लिय लगातार आवाज़ उठाना। बीते दिनों ऐसी कई विडियो सामने आई है जिसमे अफ़ग़ान महिलाओं ने खुल कर कहा की वह तालिबान आतंकी से डर चुप नहीं रहने वाली और वो लगाकर अपने हक़ के लिय आवाज बुलंद करती रहेगी।

लोगो का आवाज़ उठाना भी अहम हैं।

आज अफ़गान की स्थिति अत्यंत गंभीर है। इस वक्त वहां के लोगो को खाने रहने के लिय भी भारी कीमत चुकानी पड़ रही हैं। ऐसे में अपने मौलिक अधिकार के लिए अपनी आवाज़ उठाना बहुत जरूरी है। न सिर्फ अफ़गानिस्तान के लोगो के लिए बल्कि ये कर्तव्य देश के हर होने में बसे लोगो का है। मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना हम सब का अधिकार हैं। क्योंकि, ” जितना गलत अन्याय करना हैं उससे भी ज्यादा अन्याय पर चुप्पी साधे रहना हैं।

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