‘अकबर,जहांगीर, हुमायूं थे डकैत’ हमारे इतिहास के साथ हुई है छेड़छाड़- मनोज मुंतशिर

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इन दिनों सुर्खियों में मशहूर गीतकार, पटकथा लेखक और कवि मनोज मुंतशिर हैं। उनका इन इन दिनों सुर्खियों में होने का कारण उनका एक वीडियो क्लिप है। जो की उन्होंने 24 अगस्‍त को ट्विटर पर ट्वीट किया था जो की कुछ ही घंटों में वायरल हो गया। बता दें की इस वीडियो क्लिप में मुंतशिर ने जहांगीर, अकबर और हुमायूं को ‘ग्‍लोरिफाइड’ डकैत बताते हुए कहा है की ये सभी बस भारत को लूटने आए थे और हमारी इतिहास की किताबें इन्हे महान बताती हैं जिन्हे बदलने की सख्त जरुरत है ताकी आने वाली पीढ़ियाँ भारत के असली और सही हीरो को जान सके।

मनोज मुंतशिर ने वीडियो में क्‍या कहा है ?

मशहूर गीतकार, पटकथा लेखक और कवि मनोज मुंतशिर ने अपने करियर में बहुत ही हिट गाने दिए हैं, मुंतशिर ने ‘केसरी’ और ‘भुजः द प्राइड ऑफ इंडिया’ जैसी कई बड़ी फिल्मों के गीत लिखे हैं, अपने ट्विटर हैंडल से मनोज मुंतशिर ने एक वीडियो क्लिप शेयर किया था और लिखा था की – ‘आप किसके वंशज हैं?’ इस वीडियो में मुंतशिर कह रहे हैं कि “देश का ब्रेनवॉश किया गया है और सड़कों का नाम अकबर, हुमायूं और जहांगीर जैसे ‘डकैतों’ के नाम पर रखा गया है, प्री-प्राइमरी के किताबों में ‘ग’ से गणेश हटाकर ‘ग’ से गधा लिख दिया गया और हमारे माथे पर बल तक नहीं पड़ा उन्‍होंने वीडियो में सवाल करते हुए कहा की, चित्‍तौड़गढ़ में 30 हजार सिविलियन को काट डालने वाला आदर्श राजा था, आगरे के किले के सामने मीना बाजार लगवाने वाला जिल्‍ले इलाही था? जिल्‍ले इलाही यानी खुदा की परछाही, ये कौन सा खुदा है जिसकी परछाही इतनी काली है, अपने हीरो और विलेन्‍स जात-पात के ऊपर उठकर चुनिए, यह इस महान देश की परंपरा हजारों वर्षो से चलती आ रही है ,साथ ही उन्होंने कहा की रावण कौन था, एक बाह्मण था फिर भी क्‍या आपने किसी ब्राह्मण को रावण की स्‍तुति करते देखा है? नहीं क्योकि इस देश की संस्कृति रही है की गलत को गलत और सही को सही कहा जाए जिसे उन लूटेरो द्वारा और वामपंथी इतिहासकारो द्वारा बदलने का पूरा प्रयास किया गया है इसे बदलने की जरुरत है अपने हीरो और विलेन को इन सब चीजों से ऊपर उठकर चुनो”।

टाइम्‍स नाउ नवभारत चैनल के साथ बातचीत में मनोज मुंतशिर ने कहीं ये बड़ी बातें

ट्विटर पर मनोज मुंतशिर का वीडियो वायरल होने के बाद 27 अगस्त को ‘टाइम्‍स नाउ नवभारत’ न्‍यूज चैनल के साथ बातचीत में मनोज मुंतशिर ने एंकर के साथ हुए इंटरव्‍यू में सोशल मीडिया पर खलबली मचाने वाले अपने इस वीडियो पर अपना पक्ष रखा है और जब उनसे एंकर द्वारा यह पूछा गया कि “उन्‍हें अचानक इस तरह की बातें करने की क्‍यों जरूरत पड़ी और एजुकेशन पॉलिसी में अब उन्‍हें कैसे खोट दिख रही है? इस पर मनोज मुंतशिर ने कहा कि अगर ‘ग’ से गधा शुरू से होता तो उसमें कोई दिक्‍कत नहीं थी, लेकिन वो शुरू से नहीं था बल्कि, 70 के दशक में यह बदलाव पूरे होशो हवास में जान कर किया गया था इसका मुख्य कारण है कि उस समय के पॉलिसीमेकर को ‘ग’ से गणेश सूट नहीं करता था यह उनके एजेंडा में फिट नहीं बैठता था इसलिए उन्होंने इसको हटाया उन्‍होंने कहा कि वह ‘गणेश जी’ की वकालत नहीं कर रहे हैं बल्कि उनके कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि जो हमारी हजारों-हजार सालों की पुरानी परंपरा रही है, हम उसे तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश नहीं करें” साथ ही मुंतशिर ने यह भी कहा कि “उन्‍होंने अपने पूरे वीडियो क्लिप में कहीं एक जगह भी एंटी-इस्‍लाम और एंटी-मुस्लिम बात नहीं की फिर भला कैसे लोग उन पर फसाद भड़काने का आरोप लगा रहे हैं, मुंतशिर बोले, ‘मैं अपने पिता के पांव छूता हूँ और पूरे गर्व से छूता हूँ मुझे अपनी लीगेसी पर गर्व है, ‘ आप जात-पात देखकर अपने हीरो नहीं चुन सकते हैं अपने हीरो को जात-पात से ऊपर देखो और हमारे इतिहास के साथ जो छेड़छाड़ हुई है अब उसे बदलने का समय है ताकि हमारे आने वाले पीढ़ियों को अपना असली हीरो जानने और चुनने का हक़ मिल सके उन्होंने यह सवाल करते हुए कहा की क्या हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपना सही हीरो, अपना आइडल चुनने का भी अधिकार नहीं है क्या? और हमारे इतिहास की किताबें जिन्हे हम हमेसा से सच मानते आए हैं वो 90% वामपंथियों द्वारा लिखी गई हैं यह मात्र एक इत्तेफाक की बात तो है नहीं है बल्कि इतिहास को तोड़ने मरोड़ने का प्रयास किया गया है, जिसे हम हमारी इतिहास की किताबें जिले इलाही और महान बताती आई है वो असल में लूटेरे और डकैत थे जो की बस भारत को लूटने आए थे और हमारा भारत सोने की चिड़िया था जिसे लूटने आए ये डकैत यही रह गए असल में पूरे भारत पर कभी इनका कब्ज़ा रहा ही नहीं इन मुग़लों को कई बार छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे भारतवर्ष के वीरों ने धूल चटाई है पर फिर भी हमारी इतिहास की किताबें आज तक इन लूटेरों को महान बताती आई हैं, आज जब कई और इतिहासकारों की किताबों को पढ़ने पर और इंटरनेट पर तमाम बातें पढ़ने पर पता चलती है की ये तो बस लूटने आए थे जिन्हें आज हमारे देश मे महान बताया जाता है तो दुःख होता है की हमको आपने हमारे असली हीरो चुनने का भी मौका छीन लिया अब समय यह है की इस छेड़छाड़ की गई इतिहास को बदल कर हमारे सही इतिहास को आने वाली पीढ़ियों को सौंपा जाए ताकि वो अपना असली हीरो चुन सके”।

मुंतशिर ने इतिहासकारों से भी जताई नाखुशी

मनोज मुंतशिर ने देश के इतिहास की बात करते हुए कहा कि “इस देश के इतिहासवेत्ता बहुत आलसी रहे हैं, उनसे भी मेरी नाराजगी है साथ ही उन्‍होंने कहा, “मैं अपने निजी फायदे के लिए चुप नहीं रह सकता, मैं इसलिए जिंदा हूं कि मैं बोल रहा हूं, दुनिया किसी गूंगे की कहानी नहीं कहती’ मुंतशिर बोले, ‘वीर सावरकर, महाराजा हम्मीर सिंह, महाराजा छत्रसाल, हमें इनके बारे में आज बैठकर बात करनी पड़ रही है, तो ये अफसोस की बात है” असल में ये हैं देश के असली हीरो न की वो लूटेरे जो भारत को लूटने आए थे और यहीं बस गए थे।

देश के मुसलमानों की इज्‍जत करता हूँ- मनोज मुंतशिर

साथ ही मनोज मुंतशिर ने कहा कि “उन्‍हें देश के मुसलमानों पर नाज है और वह उनकी इज्‍जत करते हैं की उन्‍होंने बंटवारे के समय हिंदुस्‍तान में रहना चुना और उन्‍हें भारत में भाई बनकर रहना है,लेकिन भाई बनकर कोई तब रहता है जब वह धर्म, मजहब, जात-पात से ऊपर उठ जाए। बाबर और अकबर पर फेंके पत्‍थर को अगर कोई मुसलमान भाई अपने सिर ले लेता है तो यह उनकी गलती नहीं है।” उन्‍होंने कहा, ‘मैं ये पत्‍थर जिंदगी भर फेंकता रहूंगा’ पत्थर मैं उन लूटेरों पर फेंकता हूँ न की मुसलमान भाइयों पर।

अशफाक, अब्दुल कलाम ये सब हैं मेरे हीरो- मनोज मुंतशिर

बातचीत के दौरान मनोज मुंतशिर ने बताया की “अशफाक उल्ला खान, एपीजे अब्दुल कलाम और अब्दुल हमीद को वह अपना हीरो मानते हैं और उन्‍होंने कहा कि क्‍या मैं उन्‍हें इसलिए हीरो नहीं मानूं क्‍योंकि मैं हिंदू हूँ यह हमारी संस्कृति नहीं है और इतना छोटा तो हम नहीं सोचते रावण ब्राह्मण होते हुए भी मेरा हीरो नहीं है उसका पुतला मै ज़िन्दगी भर जलाता रहूँगा, जयचंद भी मेरा हीरो नहीं हो सकता, इसलिए अपने हीरो को जात-पात और धर्म से ऊपर उठकर चुनो और लूटेरों को महान बताना बंद करो।

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