यूनिवर्सिटी जाने की इजाजत तो दी, लेकिन रख दी अजीबो – गरीब शर्ते- तालिबान।

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अफगानिस्तान में तालिबान ने अपनी सरकार बना ली है और शासन करना भी शुरू कर दिया है। यही नहीं अब तो लगातार अपनी तुगलकी फरमान जारी कर रहा चाहे वो महिलाओं को लेके हो या बच्चो, पूरे देश में अपने नाम का डर और भय बनाने में लगा है। तालिबान ने महिलाओं को यूनिवर्सिटी जाके उन्हे ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने की इजाजत तो दे दी है लेकिन वही इसके साथ थी अपनी कुछ शर्ते भी रख दी है। अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री का कहना है कि महिलाएं विश्वविद्यालयों में जाकर ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल की पढ़ाई कर सकती हैं, लेकिन लड़के और लड़कियों की कक्षाएं अलग-अलग होंगी और इस्लामिक कपड़े पहनना भी अनिवार्य होगा। तालिबान इससे पहले अपनी पिछले सत्ता के दौरान भी बहुत सी चीजे बैन कर दी थी जैसे संगीत, कला, पेंटिंग्स, और भी बहुत चीजों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

महिलाओं पर कर रहा अत्याचार।

तालिबान अफगानिस्तान में औरतों के बहुत ही घटिया कानून बना रहा वहा पर महिलाओं को घर से बाहर निकलने की इजाजत है अगर वो निकलती भी है तो उनका पूरा शरीर बुर्के से कवर होना चाहिए। तालिबान एक 33 साल की महिला की आखें निकाल ली जाती है। खटेरा ने अपने साथ हुए अत्‍याचार की जो दास्‍तां सुनाई है वह दहलाने वाली है। इस महिला को पहले तो तालिबानी लड़ाकों ने उन्‍हें कई बार चाकू घोंपे और फिर उनकी आंखें निकाल लीं। उस समय यह महिला 2 महीने की गर्भवती थी। तमाम मिन्‍नतें भी उसे तालिबानियों से नहीं बचा सकीं लेकिन किस्‍मत से वो जिंदा बच गईं और अपनी आंखों का इलाज कराने किसी तरह दिल्‍ली पहुंच गई। जिस समय तालिबानियों ने खटेरा को घेरा था वे गजनी शहर में अपने काम के बाद लौटकर घर जा रही थीं।

महिलाओं को इंसान नहीं मानता तालिबान।

खटेरा कहती हैं, ‘तालिबान की नजर में महिलाएं इंसान नहीं है, बल्कि वे केवल गोश्‍त का टुकड़ा हैं, जिनके साथ कितनी भी बेरहमी की जा सकती है। वे (तालिबान) पहले हमें प्रताड़ित करते हैं और फिर दूसरों को इस सजा का नमूना दिखाने के लिए शरीर को कभी चौराहे से लटका देते हैं तो कभी महिलाओं की लाशों को कुत्तों को खिला देते हैं। मैं भाग्यशाली था कि मैं इससे बच गई।’ वे आगे कहती हैं, ‘अफगानिस्तान में तालिबान के अधीन रहना क्‍या होता है इसकी कल्‍पना करना भी मुश्किल है क्‍योंकि वो जिंदगी महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के लिए नरक की तरह होती है।

अपनी तुगलकी फरमान जारी करते हुए तालिबान औरतों को हिल सैंडल पहनने पर भी रोक लगा दिया है वो इसलिए कि सैंडल से निकलनी वाली आवाज से मर्द भटक जाते है,ये तालिबान के घटिया मानसिकता को दर्शाता है। वही 15 साल से ऊपर और 45 साल से काम बच्चियों और महिलाओं की लिस्ट जारी की गई है। जिनका जबरन तालिबान लड़ाकू से शादी कराई जायेगी। एक तरफ तालिबान कहता है को हम पिछले शासन में हमने जो गलतियां की है महिलाओं पर अत्याचार किया है अब हम वो सब दोबारा दोहराने वाले नही है, लेकिन ये सब सिर्फ तालिबान का दिखावा है संयुक्त राष्ट्र में अपनी अच्छी चाप छोड़ने के लिए लेकिन अगर जमीनी हालात देखे तो बात कुछ और ही है। जहां पर सबसे ज्यादा महिलाएं ही इनके टारगेट पर है।

महिला क्रिकेट पर भी लगा दी पाबंदी।

महिलाओं के पतन की शुरुवात तालिबान में शुरू हो चुकी है ऐसे में खेल में भी प्रतिबंध लगा चुका है तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा की महिलाओं के खेलो पर हम प्रतिबंध लगा चुके है और खास तर पर महिला क्रिकेट क्यूंकि खेल के दौरान उनका मुंह और शरीर ढका नही जा सकता, इस्लाम का हवाला देते हुए कहा की हमारा इस्लाम महिलाओं को इस तरह से दिखने की इजाजत नही देता। तालिबान के अनुसार, यह मीडिया का युग है जिसमें फोटो और वीडियो देखे जायेंगे। इस्लाम और इस्लामी अमीरात महिलाओं को क्रिकेट या ऐसे खेल खेलने की अनुमति नहीं देता जिसमें शरीर दिखता हो। तालिबान पुरूष क्रिकेट जारी रखेगा और उसने टीम को नवंबर में आस्ट्रेलिया में एक टेस्ट खेलने जाने की इजाजत दे दी है।

बिना पुरुषो वाली कक्षाओं में पढ़ेगी महिलाएं।

महिलाएं अब पढ़ने जायेगी लेकिन पूरे कक्षा में सिर्फ महिलाएं ही होगी वहा पुरुष नही होगे, उनको पुरुषो के साथ पढ़ने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा लड़कियों को पढ़ाने के लिए महिला या फिर बुजुर्ग शिक्षक ही रखे जा रहे हैं। इन सब के विरोध में अपने अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहीं महिलाओं का प्रदर्शन पूरे अफगानिस्तान में बढ़ रहा है। काबुल में सड़कों पर उतर चुकी महिलाओं का प्रदर्शन उत्तर-पूर्वी प्रांत बदख्शां पहुंचा गया है। यहां पर भी कई महिलाएं सड़क पर उतर आई हैं।

तालिबान ने कहा महिलाओं का काम सिर्फ बच्चा पैदा करना।

अफगानिस्तान में महिला अधिकारों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। कैबिनेट में एक भी महिला को जगह नहीं मिली है, तालिबान का कहना है कि उनका काम सिर्फ बच्चे पैदा करना है। एक महिला मंत्री नहीं बन सकती। महिला का मंत्री बनना ऐसा है, जैसे उसके गले में कोई चीज रख देना, जिसे वो उठा नहीं सकती हैं। महिलाओं का कैबिनेट में होना जरूरी नहीं है। उन्हें बच्चे पैदा करना चाहिए। उनका यही काम है। महिला प्रदर्शनकारी अफगानिस्तान में सभी का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हैं। यह बयान है तालिबान के प्रवक्ता सैयद जकीरुल्लाह हाशमी का। सत्ता हथियाने के समय महिलाओं को उनके अधिकार देने की बात करने वाले तालिबान के सुर सरकार गठन के साथ ही बदल गए हैं। उन्हें उतने ही अधिकार दिए जा रहे हैं, जितने में वे सिर्फ जिंदा रहने के लिए सांस ले सकें।

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