क्वाड से हो रही चीन को घबराहट- 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति ‘जो बाइडेन’ ने बुलाई क्वाड देशों की अहम बैठक

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U.S. President Joe Biden speaks while visiting the Federal Emergency Management Agency (FEMA) headquarters in Washington, D.C., U.S., on Monday, May 24, 2021. Biden today announced a doubling of federal spending on preparations for severe weather events, the president's latest move to put climate change at the center of his domestic agenda. Photographer: Oliver Contreras/Sipa/Bloomberg

आने वाले 24 सितंबर को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा वाशिंगटन में क्वाड देशों की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद से ही चीन की बौखलाहट साफ तौर पर नजर आ रही है, इस बैठक को लेकर चीन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि क्वाड जैसे संगठनों का कोई भविष्य नहीं है और इस बैठक को लेकर चीन ने आपत्ति भी जताई है।

क्वाड देश दुनिया के सबसे मजबूत संगठनों में से एक है, जिसमे की संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, इंडिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया ये चार देश आते हैं, इस क्वाड से वर्तमान समय में चीन बहुत ही ज्यादा चिढता आया है, बता दें कि वर्तमान में इन चारों क्वाड देशों की चीन के साथ ज्यादा बनती नही है, किसी न किसी मुद्दे को लेकर क्वाड के देशों से चीन के विवाद बने हुए हैं, आने वाले 24 सितंबर को क्वाड देशों की एक अहम बैठक बुलाई गई है जो कि वाशिंगटन में होने वाली है और जिसकी मेजबानी इस बार अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन करने वाले है, इस बैठक में क्वाड देशों के नेता एक दूसरे से 24 सितंबर को मिल रहे हैं जिसके बाद से ही चीन के तरफ से इस बैठक को लेकर तमाम तरह के टिप्पड़ियां सामने आने लगीं हैं। इस बैठक के बारे में ‘झाओ लिजियन’ जो कि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हैं उन्होंने कहा है कि “इस संगठन को किसी तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं करना चाहिए, न ही उसके हितों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए” इसी के साथ ‘झाओ लिजियन’ ने यह भी कहा कि “क्वाड समूह ज्यादा लोकप्रिय नहीं होगा और इसका कोई भविष्य नहीं है” जो कि चीन की बौखलाहट को साफ तौर पर दिखाता है कि आखिर चीन क्वाड देशों की बैठक से किस प्रकार चिढ़ता है।

जाने क्या है क्वाड ?

क्वाड यानी की क्वाड्रीलैटरल सिक्टोरिटी डायलॉग यह 4 देशों का एक संगठन है जिसमे की भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया व अमेरिका का बहुपक्षीय समझौता है और इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति को बनाए रखना और शक्ति के संतुलन को भी सही तरीके से बनाए रखने का है। बता दें कि क्वाड को बनाने के लिए साल 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ‘शिंजो एबी’ ने क्वाड का एक प्रस्ताव रखा था, जिसे अन्य तीनो देश भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने समर्थन दिया था इस प्रकार से क्वाड संगठन की शुरुआत हुई थी हालांकि 10 साल तक यह संगठन निष्क्रिय ही रहा था, साल 2017 में फिर से एक बार क्वाड के सभी सदस्य मिले और 2 साल बाद 2019 में इनके विदेश मंत्रियों की बैठक भी हुई, यह संगठन दुनिया के 4 शक्तिशाली देशों को मिलाकर बनाया गया है जिससे वर्तमान के समय मे चीन सबसे ज्यादा चिढ़ता आया है।

चीन के बढ़ते वर्चस्व को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया था क्वाड

बता दें कि क्वाड का प्रस्ताव जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा चीन के बढ़ते वर्चस्व को कम करने के लिए रखा गया था, जिस प्रकार से चीन पड़ोसी देशों को धमकाने और समुद्र में अपने सैन्य बेस को लगातार बढ़ाने का काम कर रहा था, यही मुख्य वजह थी जिसके लिए जापान द्वारा इस प्रस्ताव को रखा गया था और साल 2007 में एशिया-प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते वर्चस्व को कम करने के उद्देश्य से ही इसका गठन किया गया था और क्वाड के तहत प्रशांत महासागर, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में फैले विशाल नेटवर्क को जापान और भारत के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकी चीन के वर्चस्व को कम करने का प्रयास क्वाड द्वारा किया जा सके।

जाने चीन क्वाड से क्यो है परेशान

बता दें कि चीन, दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में क्षेत्रीय विवादों में शामिल हैं और वहां पर स्थित सभी छोटे देशों को लगभग धमकी देता आ रहा है, पूर्वी चीन सागर की बात करें तो वहां पर जापान का चीन के साथ समुद्री विवाद है और अब क्वाड की सक्रियता से चीन की बौखलाहट बढ़ गई है क्वाड के सक्रियता को देखकर चीन को यह भी डर लगा रहता है कि इन ताकतवर देशों के पास आने से समुद्र में उसके अस्तित्व को खतरा हो सकता है और अब उसे कई आसियान देशों को धमका कर अपनी वर्चस्व को बढ़ाने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा।

क्वाड की होने वाली बैठक को लेकर चीन ने क्या कहा

वाशिंगटन में होने वाले क्वाड के बैठक पर चीनी प्रवक्ता ने यह कहा है की “चीन न केवल एशिया प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक विकास का इंजन है, बल्कि चीन दुनिया भर में शांति की रक्षा करने वाली मुख्य ताकत भी है, चीन के विकास से एशिया क्षेत्र और दुनिया भर में शांति की ताकतों में इजाफा हुआ है, क्वाड से संबंधित देशों को शीत युद्ध की मानसिकता और संकीर्ण सोच वाली भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को छोड़ देना चाहिए और उन्हें क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को सही ढंग से देखना चाहिए तथा क्षेत्रीय एकजुटता और सहयोग बढ़ाने के लिए और काम करना चाहिए”, बता दें कि अब चीन की तरफ से ऐसे बयान भी सामने आने लगे हैं जिसमे वो अपने आप को दुनिया का सुपर पावर बताने में लगा हुआ है और वो अब अमेरिका को पीछे छोड़ने की बात करता आ रहा है।

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