श्रीलंका में हुई खाने की कमी, सरकार ने घोषित किया इमरजेंसी

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भारत के पडोसी देश श्रीलंका की सरकार ने देश में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है क्योंकि निजी बैंकों के पास आयात के लिए विदेशी मुद्रा की कमी है।और इसी विदेशी मुद्रा की कमी होने के बाद खाद्य संकट बिगड़ गया है।

भारत के पडोसी देश श्रीलंका ने मंगलवार को भोजन की कमी को लेकर आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी क्योंकि निजी बैंकों के पास आयात के लिए विदेशी मुद्रा की कमी थी। बता दें की श्री लंका अगर खाने की वस्तुओं को इम्पोर्ट करता है तो उसके भुगतान के लिए इस समय श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा अब बचे हैं नहीं और इसी वजह से ना सिर्फ खाद्य पदार्थ बल्कि पेट्रोल, डीजल इसकी भी कमी महसूस की जा रही है और इस वक़्त श्रीलंका एक बहुत बड़े संकट में है आज के वक़्त वहां की मिडिल क्लास, लोअर मिडिल क्लास या फिर गरीब सब लोग लाइन में खड़े होकर इंतजार कर रहे हैं की कब उनको रोज मर्रा की जरुरत की चीजें जैसे की दूध, आटा ,चावल, ब्रेड ये सब मिल सके क्योकि वहां की दुकाने काफी जगह बंद हो चुके है और जहाँ पर खुले भी है वहां पे इन्होने यह नियम लगा दिया है की एक आदमी को लिमिटेड खाने क सामान ही बेचेंगे ताकि यहाँ सभी को जरुरत की चीजे मिल पाए। और वो भी एक ऐसे देश में जहा पे खाने की वैसे भी कमी हो वहां पे ऐसा माहौल हो जाए तो गरीब हो अमीर सभी लोग खाने की होड़ न लग जाए तो इसी को रोकने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे ने कहा है कि “देश एक कठिन आर्थिक संकट से जूझ रहा है, साथ ही उन्होंने चीनी, चावल और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की जमाखोरी का मुकाबला करने के लिए आपातकालीन नियमों का आदेश दिया।

श्रीलंका में खाने की कमी क्यों आई?

आपको बता दें की श्रीलंका अपना बहुत सारा खाद्य पदार्थ दूसरे देशों से आयात करता है जैसे की चावल, दाल और बहुत से खाद्य पदार्थ श्रीलंका बहार के देशों से खरीदता है और जब कोई देश बाहर के देशों से कुछ खरीदता है तो उसे उस सामान के लिए भुगतान भी करना होता है तो इसके लिए पेमेंट विदेशी मुद्रा से किया जाता है अपने देश के मुद्रा से पेमेंट करने पे अपने देश में करेंसी को और छापना पड़ता है और जिससे उस करेंसी का मूल्य गिरता रहेगा तो इसी वजह से भुगतान विदेशी मुद्रा में किया जाता है साफ़ शब्दों में बात की जाए तो श्रीलंका के पास आज बहुत ही कम विदेशी मुद्रा बची हुई है इसलिए इनकी सरकार न खाना आयात कर पा रही है न ही कच्चे तेल यानी की पेट्रोल डीजल और नेचुरल गैस आयात कर पा रही है जिससे कि डिमांड ज़्यादा और सप्लाई कम हो गई है।

श्रीलंका की सरकार ने ले रखा है भारी कर्ज

श्रीलंका की सरकार ने बहुत कर्ज भी ले रखा है ,आज के समय में श्रीलंका ने कर्ज इतना ले रखा है की उसके ब्याज में ही जो इनके पास विदेश मुद्रा बचा हुआ है वो भी चला जाएगा और इसी के साथ ही श्रीलंका की करेंसी की भी वैल्यू लगातार गिरती जा रही है क्योकि वहाँ की सरकार लगातार अपनी ही करेंसी को छापना शुरू कर दिया है। श्रीलंका पर कर्ज की बात करें तो उनके कुल विदेशी मुद्रा के 10% का कर्ज जो है वो आता है चाइना से और साथ ही और कई जगहों से श्रीलंका ने कर्ज ले रखा है।

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था की हालत हुई खराब

2020 में महामारी के कारण अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई और पिछले साल मार्च में सरकार ने विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए स्थानीय खाना पकाने में एक आवश्यक मसाला खाद्य तेल और हल्दी सहित वाहनों और अन्य वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया।

श्रीलंका में मोटर चालकों से ईंधन को संयम से उपयोग करने की अपील

बैंक के आंकड़ों के अनुसार, श्रीलंका का विदेशी भंडार जुलाई के अंत में गिरकर 2.8 बिलियन डॉलर हो गया, जो नवंबर 2019 में 7.5 बिलियन डॉलर था, जब सरकार ने सत्ता संभाली थी और रुपया उस समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने मूल्य का 20 प्रतिशत से अधिक खो चुका है। ऊर्जा मंत्री उदय गम्मनपिला ने मोटर चालकों से ईंधन का संयम से उपयोग करने की अपील की है ताकि देश अपनी विदेशी मुद्रा का उपयोग आवश्यक दवाएं और टीके खरीदने के लिए कर सके तो वहीँ राष्ट्रपति के एक सहयोगी ने चेतावनी दी है कि जब तक खपत कम नहीं की जाती, तब तक ईंधन राशनिंग को साल के अंत तक पेश किया जा सकता है।

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