विकास दुबे पंडित जी के नाम से कैसे हुआ मशहूर, किस पार्टी का मिला समर्थन, उसके गांव वालों ने खोले कई राज, पढ़ कर दंग हो जायेंगे

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 80 किलोमीटर दूर पर स्थित कानपुर औद्योगिक क्षेत्र, विद्यालय, यूनिवर्सिटी के लिए खूब बखाना जाता है।लेकिन विकरु कांड के बाद गैंगस्टर विकास दुबे कानपुर का पहला पहचान बन गया।”मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला” अपराधी विकास दुबे द्वारा कहे गए यह शब्द खूब चर्चा में आए। 10 जुलाई 2020 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने माफिया विकास दुबे को एनकाउंटर कर ढेर कर दिया। विकास दुबे को मरे अब 1 साल से भी ज्यादा दिन हो चुके है। लेकिन क्या अब विकास दुबे का दहशत खत्म हो गया है? क्या विकास दुबे अपने गांव वालों के लिए मसीहा था? विकास दुबे को पंडित जी के नाम से क्यों पुकारते थे लोग? सभी राजनीतिक पार्टियों में विकास दुबे की अच्छी पकड़ कैसे थी? विकास दुबे के खिलाफ पिछली सरकारों ने कोई बड़ा एक्शन क्यों नहीं लिया ? इन तमाम सवालों के पहलुओं को सुलझाने के लिए हम विकास दुबे के गांव पहुंचे वहां हमें कई हकीकत का पता चला जो हम अब आपको भी बताने जा रहे हैं।

कैसा है अब विकास दुबे के गांव विकरू का माहौल?

विकास दुबे के चलते बिकरु गांव को पूरे कानपुर के लोग जानते हैं।बिकरू गांव के आसपास करीब 40 किलोमीटर के क्षेत्र में बच्चा-बच्चा विकास दुबे के घर का पता जानता है। आप किसी से भी पूछेंगे विकास दुबे का घर कहां है, वहां के लोग तुरंत जवाब में विकास दुबे को पंडित जी से संबोधित करते हुए उसके घर का पता बता देंगे। विकास दुबे के गांव में वर्तमान समय में बिल्कुल सन्नाटा छाया हुआ रहता है। वीरान जंगल सा विकास दुबे का गांव सुनसान पड़ा है। विकास दुबे का किलेनुमा घर अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। महंगी गाड़ियां, ट्रैक्टर सब तोड़े जा चुके है। किले की तरह खड़ा महान किला अब जमींदोज हो चुका है। हां लेकिन गांव में आपको अच्छी सड़कें, स्वच्छ पानी की सुविधा, पक्के मकान, तथा स्ट्रीट लाइट भी देखने को मिल जाएगी। कमोवेश देखा जाए तो विकास दुबे के गांव का विकास हुआ है।

दहशत का माहौल अब खत्म हो चुका है?

विकास दुबे कितना खूंखार अपराधी था इसका पता इसी बात से लगाया जा सकता है की विकास दुबे को मरे आज 1 साल से ज्यादा दिन बीत चुके हैं। लेकिन आज भी विकास दुबे के गांव में कोई इसके खिलाफ बोलने के लिए तैयार नहीं हो सकता। हमने विकास दुबे के पड़ोसियों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन किसी ने भी विकास दुबे (पंडित जी) को पूरा नहीं नहीं बताया। पड़ोसियों विकास दुबे को बड़े सम्मान से आज भी पंडित जी के नाम से पुकारते हैं।
कहीं ना कहीं आज भी गांव वालों के मन में डर है, गांव के हैं कुछ लोगों ने कहा कि अभी विकास दुबे का एक भाई जिंदा है इसलिए हम खुलकर पंडित जी के बारे में कुछ नहीं बता सकते। पूरे गांव में हमें एक ऐसे व्यक्ति का दर्शन हुवा जो खुलकर विकास दुबे के विरोध में बोल रहा था। वह एक बीजेपी का कार्यकर्ता है। उसने हमें बताया कि विकास दुबे के नाम पर गांव में खूब गुंडागर्दी होती थी। खेतों में से लोग पंडित जी ने मगाया है बोलकर सब्जियां बिना पैसे दिए उठा ले जाते लेकिन मजाल नहीं थी कि पंडित जी के खिलाफ कोई एक लफ्ज़ बोल सके।

क्या ब्राह्मणों का हितैषी था विकास दुबे?

विकास के काले कारनामों के शुरुआत सिद्धेश्वर पांडे के कत्ल से हुआ सिद्धेश्वर पांडे विकास दुबे के गुरु थे जमीन के कारण विकास दुबे ने अपने गुरु को ही मार डाला था। सिद्धेश्वर पांडे की जाति से ब्राह्मण थे, उसके बाद से लगातार विकास दुबे ने कई ब्राह्मणों की हत्या की जिसमें दर्जा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ला केबल ऑपरेटर दुबे समेत कई लोग शामिल है। लेकिन जब हमने गांव वालों से पूछा कि क्या सच में विकास दुबे ब्राह्मणों का मसीहा था तो गांव वालों ने बोला हां विकास दुबे जब तक जिंदा थे यहां ब्राह्मणों का ही बोलबाला था। ग्राम प्रधान हर बार निर्विरोध चुने जाते थे लोकतंत्र के नाम पर अपने ही व्यक्तियों को चुनाव लड़ वाया जाता जबकि हकीकत तो यह है कि बिकरू गांव का प्रधान वही होगा जिसे पंडित जी प्रत्याशी बनाएंगे। होता भी ऐसा ही था। गांव वाले बताते हैं कि विकास दुबे के जिंदा रहने से एक बात अच्छी थी कि अब इस गांव में चोरी डकैती नहीं होती थी। लोगों के अंदर विकास दुबे यानी पंडित जी का खौफ था।

किन पार्टियों के संरक्षण में पला विकास दुबे?

अमूमन गांव वालों से बात करने पर यह पता चलता है कि विकास दुबे मुख्यतः बहन जी यानी मायावती के पार्टी बहुजन समाजवादी पार्टी से संबंध रखता था। माना जाता है कि विकास दुबे बहुजन समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ने वाला था। लेकिन सबसे खास बात यह भी है जो हमें गांव वालों के द्वारा पता चला की विकास दुबे की व्यक्तिगत पहचान सभी दलों के राजनेताओं से थी। यही कारण है कि सरकार किसी की भी हो विकास दुबे का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता था। विकास दुबे के ऊपर कोई कार्यवाही इसलिए नहीं करता था क्योंकि विकास दुबे अपने बाहुबल के दम पर अपने क्षेत्र के वोटों पर कब्जा रखता है और सभी राजनीतिक पार्टियों को उसके क्षेत्र से वोट अपने पाले में लाने के लिए विकास दुबे का समर्थन करना ही पड़ता था। यही मुख्य कारण है कि लगातार अपराध करने के बाद दे विकास दुबे न्यायालय और पुलिस के चंगुल से बच जाता था।

योगी आदित्यनाथ ने उठाया ठोस कदम

जब हम गांव वालों से पूछते हैं कि अगर योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ना होते तो क्या विकास दुबे मारा जाता तो हमें गांव वाले हमें बताते हैं कि अगर योगी आदित्यनाथ जैसे साथ ही मुख्यमंत्री ना होती तो आज भी विकास दुबे का कोई बाल भी बांका ना कर पाता। योगी आदित्यनाथ अपने कार्यकाल के शुरुआत में ही माफियाओं को सचेत कर दिया था। फिर कभी भाषण में तो योगी आदित्यनाथ ने यहां तक कह दिया था कि अगर माफिया गिरी या बाहुबल दिखाना हो तो प्रदेश छोड़ दो। हकीकत भी कुछ इसी तरह का देखने को मिला आज उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी पहले के मुकाबले बहुत कम हो गई। यही मुख्य कारण है कि योगी से पंगा लेना विकास दुबे को भारी पड़ गया और उसे योगी की पुलिस ने मौत की नींद सुला दिया।

क्या योगी से खुश है विकास दुबे के गांव के लोग

विकास दुबे के बारे में चर्चा करने के साथ-साथ हमने उसके गांव के लोगों से योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती के बारे में भी पूछा मुख्यतः हम यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि आगामी विधानसभा चुनाव विकास दुबे का फैक्टर काम करेगा या नहीं?
जवाब में हमें यह मिला की योगी आदित्यनाथ के इस फैसले से जनता खुश है। जिस तरह से योगी आदित्यनाथ ने माफियाओं का सफाया किया है उसे जनता बेहद खुशी और उन्हें धन्यवाद भी देती है। इसी कड़ी में विकास दुबे के मारे जाने से भी विकास दुबे के काम वाले कहीं ना कहीं खुश नजर आते है।

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