कानपुर में रिक्शा चालक के पिटाई के मामले ने पकड़ी तेज़ी सियासत, ओवैसी और अखिलेश ने भाजपा पर साधा निशाना

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कानपुर में मुस्लिम रिक्शा चालक के साथ हुए मारपीट के मामले में अब सियाशी जंग तेज़ होती नजर आ रही है। जहाँ एक तरफ सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे को लेकर अपने तरह-तरह के विचार रख रहे हैं वही अब इस मारपीट के मुद्दे ने उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा के चुनाव के लिए पार्टियों के लिए एक अहम मुद्दा भी बन गई है । AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरे मामले के ऊपर ट्विटर के माध्यम से ट्वीट कर इस घटना के ऊपर अपनी बात रखी तो अब वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना की निंदा की।

जाने आखिर क्या था ये पूरा मामला

ये पूरा मामला दरअसल कानपुर के एक बस्ती का है, जिसका नाम बर्रा आठ की कच्ची बस्ती है, उस बस्ती की एक महिला निवासी ने उसके पड़ोस में रहने वाले सलमान, सद्दाम और मुकुल इस तीनो पर महिला की बेटी से छेड़छाड़ और साथ ही 20 हजार रुपये का लालच देकर मंतातरण कराने का आरोप इन तीनो पर लगाया था, जिस पर पुलिस प्रशासन ने मुकदमा भी दर्ज किया था पर पुलिस ने मंतातरण की धारा को हटा दिया था। इस मंतातरण की धारा को हटाने की वजह से बुधवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा कच्ची बस्ती में विरोध भी किआ गया था। इसी बीच उस रास्ते से गुजर रहे दूसरे पक्ष का अफसर जब उधर से गुजरा तो विरोध प्रदर्शन ने हंगामे का मोड़ ले लिया और आपसी झड़प में कार्यकर्ताओं ने अफसर को खींच लिया और मारपीट हुई, इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उसको पुलिस को सौंप दिया था। हालांकि पूछताछ के बाद पुलिस ने उसको छोड़ दिया था और उस वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने मारपीट करने वालो के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था। हालांकि इस वायरल हो रहे वीडियो की पुष्टि राजधर्म नहीं करता है। अब इस वायरल हो रहे वीडियो पर सोशल मीडिया पर लोग अपनी अपनी राय रख रहे है तो वही अब इस मुद्दे को तमाम पार्टी के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रतिरोप लगाते हुए इसे चुनावी मुद्दा बनाने का पूरा प्रयास कर रहे है, और कई बड़े नेता इस घटना पर अपनी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है ।

ओवैसी ने इस घटना पर ट्वीट कर निंदा भी की

AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस पूरे घटना पर अपनी प्रतिक्रिया ट्विटर के माध्यम से दी। उन्होंने ट्वीट कर यह कहा कि “देश में कट्टरपंथी हिंसक अपराधियो को ये बात अच्छे से पता है कि उन्हें तो कुछ नही होगा, इस तरह के क्रूर अपराध करने के बाद भी उन्हें सामाजिक बहिष्कार करने का भी संभावना नहीं है। उन्होंने एक मुस्लिम व्यक्ति को पुलिस के मौजूदगी में पीटा लेकिन वहाँ की पुलिस ने किसी को गिरफ्तार भी नही किया पता नही उस मुस्लिम व्यक्ति की बच्ची इस सदमे से कैसे उबर पाएगी।” अपने इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए ओवैसी ने फिर लिखा की “कोई भी सभ्य समाज ऐसे गुंडों का महिमामंडन नहीं करेगा, यदि आपके पास विवेक है तो आप मूकदर्शक नहीं बन सकते है, समाज में इस हिंसक कट्टरता से लड़ो”। हालाँकि उन्होंने मंतातरण के मुद्दे पर कोई भी ट्वीट नहीं किया है।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोलते हुए इस घटना को शर्मनाक बताया

इस घटना पर सपा अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए इस घटना को शर्मनाक बताया और कहा कि भाजपा के उकसावे पर उस निर्दोष युवक की पुलिस की मौजूदगी में सरेआम पिटाई लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बात है। अखिलेश यादव ने भाजपा को निशाने पर रखते हुए कहा कि योगी सरकार ने पूरे यूपी में अराजकता फैला दिया है। प्रदेश में कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही है ,कानून व्यवस्था पूरी तरह से धव्स्त हो चुकी है उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जबसे केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार बनी है , समाज में इस तरह की घटनाएं बढ़ गई है। जनता द्वारा चुनी गई सरकार की जिम्मेदारी है कि वो जनता का भरोसा सरकार में बनाए रखे पर भाजपा इसके विपरीत काम करती है, आपसी भाईचारे को मजबूत करने के बजाय भाजपा हमेसा से अवरोध पैदा करती आ रही है । बता दें कि यूपी में विधानसभा चुनाव होने को है जिसमे विपक्षी दल सरकार की छवि को खराब करने का पूरा प्रयास करता है , इस घटने को लेकर कई विपक्षी दल के नेता भाजपा सरकार को घेरने में लगे हुए है ।

अखिलेश ने रोजगार के मुद्दे पर भी कि टिप्पड़ी

अखिलेश यादव ने रोजगार के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार की यूपी के युवा और यूपी की जनता को रोजगार देने की कोई मंसा नही है।मुख्यमंत्री के 4 लाख नौकरियां देने का दावा पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठ है जो यूपी की जनता को मूर्ख बनाने के लिए भाजपा द्वारा किये जा रहे है। भाजपा की सरकार में युवाओं की दुर्दशा होती आ रही है, युवाओं को रोजगार देने की भाजपा सरकार की कोई मंसा ही नहीं है , यूपी के 69 हजार परिषदीय प्राथमिक विद्यालय की भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थी लखनऊ में पिछले 50 दिनों से आंदोलन कर रहे है पर सरकार उनकी एक नही सुन रही है , सरकार उनसे कोई बातचीत नही कर रही है बल्कि रोजगार के मुद्दों को लेकर जो लड़कियाँ संघर्ष कर रही है उनका दमन किआ जा रहा है। अखिलेश यादव भाजपा सरकार को तमाम मुद्दों पर पूरी तरह से घेरने में लगे हुए है हालाँकि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक पार्टियाँ और नेताओं की जुबानी जंग शुरु हो चुकी है ।

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