केंद्र के लिए गए फैसले पर आखिर बवाल क्यों, NEET आरक्षण पर किसे कितना होगा फायदा आइए जानते है।

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NEET आरक्षण को लेके केंद्र सरकार के फैसले पर आखिर क्यों हो रहा इतना बवाल, हाल में ही केंद्र सरकार ने NEET आरक्षण पर फैसला लेते हुए निर्णय दिया की OBC वर्ग के छात्रों को 27% व कमजोर आय वर्ग EWS के छात्रों को 10% का आरक्षण दिया जाएगा।

देशभर के टॉप मेडिकल संस्थानों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली NEET परीक्षा में ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation in NEET Exam) की मांग काफी समय से की जा रही थी। लेकिन इस मामले ने जोर तब पकड़ा जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 12 जुलाई को NEET 2021 की तारीखों का ऐलान किया और कहा कि इस बार की नीट परीक्षा में ओबीसी वर्ग को बिना आरक्षण के देनी होगी, इसके बाद देश भर में इसको लेके जगह जगह पर आंदोलन होने लगे और देश व्यापी हड़ताल की धमकी दी जाने लगी और साथ ही साथ कई राजनैतिक पार्टियों ने भी आरक्षण की मांग शुरू कर दी।

12 सितंबर को होनी है NEET परीक्षा।

मेडिकल यूजी प्रवेश परीक्षा नीट 2021 की तारीख की घोषणा कर दी गई है। नीट का आयोजन 12 सितंबर 2021 को किया जाएगा। पहले यह परीक्षा 01 अगस्त 2021 को होनी थी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी थी।

आइए जानते है NEET क्या है?

NEET ( National Eligibility Cum Entrance Test) ये भारत में मेडिकल एजुकेशन से जुड़े कोर्स MBBS और BDS में एडमिशन लेने के लिए एक एग्जाम होता है जिसको पास करने के बाद छात्रों को इन कोर्सेस में एडमिशन प्राप्त होता है। नीट परीक्षा को कराने का जिम्मा NTA ( National Testing Agency ) का होता है। नीट का परीक्षा दो लेवल पर होता है पहला यूजी इसको पास करके छात्रों को MBBS और BDS जैसे मेडिकल कोर्स में दाखिला मिलता है और दूसरा पीजी लेवल जिसको पास करने के बाद MS और MD जैसे कोर्सेस के दाखिला मिलता है।
NEET पहली बार 2003 में हुई थी, पर उसके अगले साल राज्यों के विरोध की वजह से बंद करनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल 2016 को इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट में नए सेक्शन 10-D को मंजूरी दी। इससे देशभर के मेडिकल कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्सेस के लिए सिंगल एंट्रेंस एग्जाम का रास्ता खुला। तब से देशभर में मेडिकल कोर्सेस में एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स को NEET देना पड़ रहा है। शुरुआत में CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल) ने यह परीक्षा कराई। पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) बनने के बाद 2018 में उसे यह जिम्मेदारी दी गई। 2020 में 15.97 लाख स्टूडेंट्स ने 13 सितंबर 2020 को NEET में भाग लिया था।

तमाम अभ्‍यर्थी मेडिकल एजुकेशन के अखिल भारतीय कोटे (AIQ) में ओबीसी आरक्षण देने की लंबे समय से मांग कर रहे थे।

AIQ ऑल इंडिया कोटा क्या है?

देश के सभी राज्यों के मेडिकल संस्थानों में साल 1984 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ‘ऑल इंडिया कोटा’ (AIQ) लागू किया गया। ऑल इंडिया कोटा राज्य के अधीन आने वाले मेडिकल कॉलेज में सीटों का वो हिस्सा है जो राज्य के कॉलेज, केंद्र सरकार को देते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा था कि सभी राज्य अपने मेडिकल कॉलेज की 15 फ़ीसदी अंडर ग्रेजुएट सीटें और 50 फ़ीसद पोस्ट ग्रेजुएट सीटें केंद्र सरकार को देंगी। केंद्र सरकार के हिस्से में आने वाली इन सीटों को ‘ऑल इंडिया कोटा’ का नाम दिया गया।

लेकिन वही 2007 तक किसी भी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए AIQ में आरक्षण नहीं होता था लेकिन पर 31 जनवरी 2007 को अभय नाथ बनाम दिल्ली यूनिवर्सिटी एवं अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया कोटे में अनुसूचित जाति को 15% और अनुसूचित जनजाति को 7.5% रिजर्वेशन देने का आदेश दिया था।

किसे कितना होगा फायदा।

अब अंडरग्रैजुएट और पोस्टग्रैजुएट के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में अखिल भारतीय कोटा योजना के तहत ओबीसी वर्ग के 27% और ईडब्ल्यूएस वर्ग के 10% छात्रों को आरक्षण मिलेगा।

सरकार के इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “हमारी सरकार ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से अंडरग्रैजुएट और पोस्टग्रैजुएट मेडिकल, डेंटल कोर्स में ऑल इंडिया कोटे के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27% आरक्षण और आर्थिक रूप से कमज़ोर (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के लिए 10% आरक्षण प्रदान करने का ऐतिहासिक फ़ैसला किया है।
मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इस फ़ैसले से एमबीबीएस में लगभग 1,500 और पोस्टग्रैजुएट में 2,500 ओबीसी छात्रों को हर साल इसका लाभ मिलेगा। वहीं ईडब्ल्यूएस वर्ग के लगभग 550 छात्रों को एमबीबीएस में जबकि 1,000 छात्रों को पोस्टग्रैजुएट की पढ़ाई में लाभ होगा।

कौन कर रहा विरोध।

इसे सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं और देश के भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए लोग आरक्षण को टैलेंट का हत्यारा बता रहे हैं। माइक्रो ब्लॉगिंग ट्विटर पर सवर्ण सांसदों को जमकर भला-बुरा कहा जा रहा है क्योंकि वो सरकार के ऐसे फैसलों का विरोध नहीं कर पाते हैं। NEET में ओबीसी आरक्षण की नई घोषणा से गुस्सा लोग ट्विटर पर तरह-तरह के पोस्टर शेयर कर रहे हैं। हर किसी की अपनी दलील है। कोई आरक्षण को सवर्ण विरोधी बता रहा है तो कोई इसे प्रतिभा के लिए दमनकारी साबित करने में जुटा है। लोग आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ कौन-कौन सी दलील दे रहे हैं और क्या वाकई में NEET में ओबीसी आरक्षण से सामान्य श्रेणी या कहें तो सवर्णों को नुकसान होगा।
सामान्य वर्ग के लोगो ने इसका जमकर विरोध अपने सोशल मीडिया पर कर रहे और सरकार को सामान्य वर्ग का विरोधी बता रहे उनका कहना है की ऐसे जो पड़े लिखे बच्चे है जो सामान्य वर्ग से आते है उनके साथ ये अन्याय होगा।

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