पुलित्जर विजेता फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी गोलाबारी में मरे या, तालिबानियों ने मारा।

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भारतीय पत्रकार व पुलित्जर पुरस्कार विजेता दानिश सिद्दीकी को 16 जुलाई को कंधार में गोली मार कर हत्या कर दी जाती है उनकी हत्या उस दौरान होती है जब वह अफगान सुरक्षा बलो के साथ वहा के हालात की कवरेज कर रहे थे। लेकिन तीन दिन पहले 13 जुलाई को दानिश सिद्दीकी ने अपने सोशल मीडिया पर अपने ऊपर जान से मारने की आशंका जताई थी और उस हमले में बाल – बाल बचे थे।

कौन था दानिश सिद्दीकी

दानिश सिद्दीकी का जन्म 1980 में मुंबई में हुआ। और उनके पिता प्रो. अख्तर सिद्दीकी जामिया मिलिया इस्लामिया से रिटायर्ड है और इनके पूर्व वह एनसीटीई के निदेशक भी रह चुके है। दानिश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के कैंब्रिज स्कूल से पूरी की हालांकि शुरू से ही फोटोग्राफी का शौक था तो उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की।

अपने करियर की शुरुवात बतौर टीवी न्यूज कॉरेस्पॉन्डेंट के तौर पर की और फिर फोटोग्राफी के रुचि थी तो साल 2010 के अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स में एक इंटर्न के रूप में काम करने लगे। दानिश सिद्दीकी ने जब कैमरे से फोटो लेना शुरू की तो उनकी तस्वीरे पसंद की जाने लगी। दानिश ने अपनी शुरुवाती कैरियर के दौरान 2015 में नेपाल में आए भूकंप, 2016-17 के दौरान मोसुल की लड़ाई, और हांगकांग कवर किया। और 2020 में दिल्ली हिंसा के दौरान एक तस्वीर बहुत चर्चित हुई थी जिसमे एक युवक हाथ में पिस्टल ताने खड़ा था। वो तस्वीर भी दानिश सिद्दीकी ने ली थी।

पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित थे दानिश

अपने काम और मेहनत की वजह से ही सिद्दीकी को साल 2018 में रायटर्स में काम करने के दौरान ही पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आई इसके अलावा भी कई अंतराष्ट्रीय अवार्ड भी जीत चुके है और अपने इसी जज्बे और मेहनत के कारण दानिश सिद्दीकी को भारत में रायटर्स पिक्चर टीम का हेड बना दिया गया।

हमले की आशंका पहले से थी।

दानिश सिद्दीकी ने 13 जुलाई को अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा की जिस बख्तरबंद गाड़ी में मै और सुरक्षा बलो के साथ यात्रा कर रहे था। उस पर कम से कम 3 आरपीजी राउंड और अन्य हथियारों से निशाना बनाया गया था। मैं लकी था कि मैं सुरक्षित रहा और मैंने कवच प्लेट के ऊपर से टकराने वाले रॉकेटों के एक दृश्य को कैप्चर कर लिया।

भारतीय होने के नाते तालिबानियों ने मारा।

16 जुलाई को अफगानिस्तान के टोलो न्यूज चैनल ने बताया की उनकी मौत कंधार के स्पिन बोल्डक जिले में हुई और कारण गोला बारी के दौरान हुई। लेकिन अफगानिस्तान ने आधिकारिक पुष्टि की दानिश सिद्दीकी की मौत अचानक से गोली लगने की वजह से नहीं हुई बल्कि फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी को तालिबानियों ने बंधक बना लिया था उसके बाद हत्या कर दी है थी। लेकिन पहली बार अफगान और तालिबान ने मौत का कारण गोलाबारी बताया था। अमेरिका स्थित वाशिंगटन एक्जामिनर पत्रिका की एक रिपोर्ट में पहली बार दावा किया गया था कि दानिश सिद्दीकी की क्रूरता से हत्या की गई थी। तालिबानियों के पहले सिद्दीकी के पहचान की पुष्टि की और फिर उसके साथ के लोगो को भी मार डाला। दानिश के साथ मौजूद उन सुरक्षा बलो को भी मार दिया गया क्यूंकि उन्होंने दानिश को बचाने को कोशिश की थी।

मरने के बाद भी नहीं बक्शा।

अफगान कमांडर बिलाल अहमद ने बताया की तालिबानियों ने भारतीय होने के नाते दानिश को मारा क्यों की तालिबान भारत से नफरत करता है। ना सिर्फ गोली मारा बल्कि मौत हो जाने के बाद भी उनके पार्थिव शरीर को क्षत- विक्षत कर दिया उनके सर के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी गई।

अपने सच पर पर्दा डाल रहा तालिबान।

इंडिया टुडे के एक रिपोर्ट से पता चला की तालिबान के एक प्रवक्ता से फोन पर बात चीत करने बताया की दानिश के मौत का जिमेदार तालिबान नही है, तालिबान के प्रवक्ता और कमांडर मौलाना यूसुफ अहमदी ने कहा हमने उसे नही मारा। वह दुश्मन ताकतों के साथ था इस वजह से उसकी मौत हुई। अगर किसी पत्रकार को यहां आना है तो वो हमसे बात करे और इजाजत ले।

भारत में दानिश के प्रति संवेदनाए

दानिश के मौत की खबर मिलते ही लोगो में मातम छा गया था है किसी ने इस खबर को अपने सोशल मीडिया पर डाल रहा और दानिश के लिए पोस्ट लिख रहे थे सिर्फ भारत में नही बल्कि विदेशों में भी दानिश के प्रति लोगो की सवेदनाए थी।

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