खुद को दलितों और किसानों के मसीहा बताते है राहुल गांधी, लेकिन अमेठी के दलितों का क्या कहना है, आइए देखते है।

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2022 आगामी विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, बस कुछ ही और महीने शेष है चुनाव होने में और ऐसे में सभी राजनैतिक दलों ने जोर लगाना शुरू कर दिया है। आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी है। हर कोई दल अपने पूरे दम-खम के साथ मैदान में उतर चुकी है, और खुद को अच्छा बताने की होड़ मची हुई है। कोई ब्राह्मण सम्मेलन, तो कोई प्रबुद्ध सम्मेलन कर रहा, वही कांग्रेस “जय भारत महासंपर्क अभियान” कर रही वही प्रियंका गांधी के नेतृत्व में एक नए कांग्रेस सोच को लेकर उत्तर प्रदेश में उतरी है इसी क्रम में एक नारा दिया गया है। “परिवर्तन का संकल्प, कांग्रेस ही विकल्प” आखिर इस नारे में कितना दम है यह देखने के लिए हमारी टीम अमेठी पहुंची। 2019 में राहुल गांधी को मिले हार के बाद राहुल गांधी अमेठी को जैसे भूल ही गए है। इतने दिनो मे सिर्फ एक बार ही अमेठी का दौरा किए है राहुल गांधी।

अमेठी और कांग्रेस।

कांग्रेस अमेठी में एक लम्बे समय तक सत्ता में रही है, अगर बात करे पूरे उत्तर प्रदेश की तो भले ही कांग्रेस पूरे यूपी में कुछ अच्छा ना कर पा रही हो लेकिन, रायबरेली और अमेठी की सीटों पर जरूर जीत मिलती थी। रायबरेली से सोनिया गांधी और अमेठी से राहुल जीत दर्ज करते थे लेकिन 2019 के चुनाव में बात कुछ और ही हो गई। अमेठी से राहुल गांधी अपनी सीट गवा बैठे और वहा से स्मृति ईरानी ने जीत दर्ज की। 1967 में अस्तित्व में आई अमेठी सीट पर यह तीसरा मौका है, जब कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। हर 21 साल बाद कांग्रेस का यहां हारने का इतिहास रहा है और यह बात राहुल गांधी की हार में भी कायम रही है। पहली बार 1977 में इंदिरा गांधी की ओर से आपातकाल लगाए जाने के विरोध में देश भर में कांग्रेस विरोध लहर के दौरान संजय गांधी इस सीट से परास्त हुए थे। यह पहला मौका था, जब अमेठी सीट कांग्रेस के हाथ से छिनी थी। उन्हें जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह ने परास्त किया था। इसके ठीक 21 साल बाद 1998 में कैप्टन सतीश शर्मा को पराजय झेलनी पड़ी थी। उन्हें बीजेपी कैंडिडेट संजय सिंह ने परास्त किया था। 1998 के बाद अब फिर 21 साल पूरे हुए हैं और कांग्रेस के लिए नतीजा पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की हार के तौर पर सामने आया।

परिवर्तन का संकल्प, कांग्रेस ही विकल्प आखिर कितना दम है इस नारे में आइए जानते है अमेठी की जनता से।

‘द राजधर्मा’ की टीम अमेठी पहुंची और वहा से लोगो से बात करने के बाद पता चला की जमीनी हकीकत यहां पर कुछ और ही है। गांव में लोगो से बात करने पर एक बुजुर्ग ने बताया की राहुल गांधी की सरकार जब यहां पर थी तो अगर वो यहां आते भी थे तो लोगो से नही मिलते थे। अगर कोई मिलने की कोशिश भी करता था तो उससे गेट से ही भगा दिया जाता था। गेट पर खड़े पुलिसकर्मी उन्हे डंडे से मार के भगा देते थे ऐसा गांव के कुछ बुजुर्ग कहते है। वही और बात करने पे पता चला की एक ही परिवार के सड़क दुर्घटना में तीन लोगो के लोगो की मृत्यु हो जाती है, जिसमे मां बहन और भाई होते है। चौकने वाली बात तो ये है की कुछ ही देर बाद वहा से राहुल गांधी का काफिला निकलता और उस समय राहुल गांधी वहा के मौजूदा सांसद थे। राहुल गांधी की गाड़ी रुकती है और वो वहा पर उतर के मामले का जायजा लेते है लेकिन बिना कुछ बोले देख के ही आगे बढ़ जाते है। ना तो किसी प्रकार का सांत्वना या फिर किसी प्रकार की मदद करने की बात करते है। वहा खड़े परिवार वालो ने हाथ जोड़ कर मदद की गुहार लगाते रहे लेकिन राहुल गांधी का काफिला आगे बढ़ गया। लोगो के बताया की अगले दिन एक किन्नर के द्वारा कुछ मदद की जाती है।

सवाल – राजधर्मा की पत्रकार एक बुजुर्ग से पूछती है, की जब राहुल गांधी ने यहां की जनता के लिए कुछ किया नही तो कैसे आप लोग भरोसा किया और वोट दिया।

जवाब – अमेठी की जनता से भूल हुई है, क्यूंकि इंदिरा गांधी के सरकार में बात कुछ और होती थी और यही सोच के हम लोगो ने दुबारा वोट किया लेकिन हम लोगो को नही पता था की हमारे साथ इस तरह का व्यवहार होगा। पहले यहां की जनता कांग्रेस के पूर्ण समर्थन में रहती थी क्योंकि इंदिरा गांधी जब सत्ता में थी तो वो यहां के लोगो के लिए खेती बारी सब दिया लेकिन जब से राहुल गांधी आए है ये कुछ नही किए। लोगो का कहना है बड़े बड़े का पूजा करते है लेकिन छोटकन के भूल जाते है। जब राहुल जीत जाते है तो कहते है हम विदेश दौरे पर है। और हम लोगो को उनसे मिलने नही दिया जाता है, जाने पर भगा दिया जाता था।

सवाल – 70 सालो से अमेठी की जनता ने को कांग्रेस पार्टी को क्यों जीता रही है फिर।

जवाब – वो झूठी बोली देता रहा और विदेश यात्रा बताता रहा। अमेठी को इतना लूटा की यहां पर शिक्षा का आभाव है, स्कूल और कॉलेजों में पीने का पानी नहीं आता और सौचालय तक की व्यवस्था नहीं है।

एक नौजवान से पूछा गया की राहुल गांधी पसंद है आपको तो जवाब मिला राहुल गांधी चुतीया है राहुल गांधी झूठे वादे करते है वो जब भी सत्ता में आते है तो उसके बाद अमेठी के जनता को भूल जाते है और विदेश यात्रा बता दुबारा झांकने नही आते।

सवाल – तो अगर राहुल गांधी नही पसंद तो बीजेपी कैसी है वो काम कर रही है।

जवाब – राहुल गांधी को झूठे वादे करते है लेकिन बीजेपी जो कहती है वो करती है यहां देख लीजिए आज सड़के अच्छी बनी हुई है ये बीजेपी सरकार की देन है न की राहुल गांधी।

स्मृति ईरानी पर कैसे विश्वास जमा पाई अमेठी की जनता।

जब स्मृति ईरानी ने अमेठी से चुनाव लड़ने का फैसला लिया और उतर गई अमेठी के जनता के बीच तो गांव के लोगो के कहा आप हमे वोट दे या न दे मैं तो चुनाव लड़ूगी लेकिन अमेठी की जनता की जो भी समस्या रहेगी उसे दूर करने के लिए पूरी कोशिश करूंगी। बात करने पर पता चलता है की अमेठी की जनता की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ में कटान की वजह से होती है , लेकिन मौजूदा सांसद राहुल गांधी ने इस पर कभी ध्यान नही दिया ऐसा अमेठी की जनता का कहना है। 2014 के लोक सभा चुनाव हार जाने के बावजूद भी स्मृति ईरानी ने वहा के लोगो को दिल्ली बुलाया और उनकी कटान को लेके समस्या सुनी और उसके बाद पूरा भरोसा दिलाया की इसके लिए बांध बनेगा और फिर उन्होंने अगले चुनाव 2019 के चुनाव में जीत दर्ज की और फिर गांव वालो को कटान से बचाने के लिए गोमती नदी पर बांध बनवाया।

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