राकेश टिकैत ने सिविल ऑफिसर को कहा “सरकारी तालिबानी”

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भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को करनाल के सिविल ऑफिसर आयुष सिन्हा को “सरकारी तालिबानी” के कमांडर कह दिया, दरअसल विरोध प्रदर्शन में पुलिस को किसानों के “सिर फोड़ने” का आदेश देने के मुद्दे को लेकर, टिकैत ने सिविल ऑफिसर को सरकारी तालिबानी कह कर बुलाया।

इस पूरे मामले की शुरुआत करनाल में हुआ, बता दें की शनिवार को करनाल में स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनाव को लेकर भाजपा की प्रदेश संगठन की बैठक थी जिसमे मुख्यमंत्री समेत भाजपा के कई और मंत्री, विधायक, सांसद भी इस बैठक में शामिल हुए थे और इस बैठक से पहले किसानों ने पहले से ही भाजपा नेताओं का विरोध करने को कहा था, इसके बाद सभी किसान बसताड़ा टोल प्लाजा पर इकठा हुए थे और जब पुलिस ने किसानों को सड़क खाली करने को कहा तो किसान नहीं हटे और वहां पर हालत अनियंत्रण हो गया हालत अनियंत्रित होने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें कई किसान घायल भी हो गए थे और साथ ही कुछ किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।

टिकैत ने अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग

पुलिस और किसानो के बीच हुए झड़प में कई किसान घायल भी हो गए थे, जिसे लेकर टिकैत ने लाठीचार्ज का आदेश देने वाले पुलिस अधिकारी को सरकारी तालिबानी अधिकारी बताया और साथ ही कहा कि “ऐसे अधिकारी की पोस्टिंग नक्सली क्षेत्र में होनी चाहिए और साथी ही उन्होंने अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की और कहा कि “जब तक ऐसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक किसान चैन से नहीं बैठेंगे, साथ ही अपने आगे के रणनीति को लेकर टिकैत ने बताया की “कल करनाल में किसान नेताओं की पंचायत होगी, जिसमें आगामी रणनीति तय की जाएगी और साथ ही लाठीचार्ज में घायल हुए किसानों का भी कहना यह है की जब तक आंदोलन चलता रहेगा, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे. चाहे इसके लिए हमें जान भी क्यों न देनी पड़े।

कौन हैं एसडीएम आयुष सिन्हा ?

बता दें की एसडीएम आयुष सिन्हा ने 2017 के UPSC-2017 परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल की थी. उन्होंने यह कमाल अपने तीसरे प्रयास में ही कर दिखाया था, और उस समय आयुष सिन्हा सुर्खियों में आए थे हर तरफ बस उनकी चर्चा थी, इससे पहले आयुष सिन्हा ने BITS गोवा से केमिकल इंजीनियरिंग भी कर रखी है पर आयुष का सपना हमेशा से ही एक IAS अफसर बनने का था, आयुष सिन्हा ने साल 2017 में UPSC-2017 परीक्षा में 7वीं रैंक हासिल कर कमाल कर दिखाया और वे एक IAS अफसर बन गए साथ ही बता दें की आयुष सिन्हा का पूरा परिवार भी काफी पढ़ा-लिखा और सभी बड़े पद पर आसीन रहे हैं।

एसडीएम आयुष सिन्हा ने इस पूरे विवाद पर क्या कहा

28 अगस्त को चुनावों को लेकर भाजपा की एक बैठक थी जिसके आस पास लॉ एंड आर्डर की जिम्मेदारी एसडीएम आयुष सिन्हा पर थी वीडियो वारयल होने के बाद एसडीएम आयुष सिन्हा इंडियन एक्सप्रेस की छपी एक खबर के मुताबिक कहा कि “विरोध स्थल बैठक के स्थान के बीच मुख्य रूप से 3 चेकपॉइंट थे मुझे सभ्स्थल पर तीसरे और अंतिम चेकपोस्ट पर तैनात किया गया यहाँ किसी के पहुंचने का मतलब है की वो दो चेकपोस्ट पार कर के आया है ये तीसरा चेकपॉइंट मीटिंग के बिलकुल पास था अगर यह तीसरा नाका टूट जाता तो हंगामे और तोड़ फोड़ की असंका थी दूसरी बात यह भी है कुछ अवांछित तत्व भी प्रदर्शन का हिस्सा बने हुए थे ये सुरक्षा के लिए चूक सावित हो सकती थी और इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने जवानो को निर्देश दिए और उन्हें प्रक्रिया बताई और मैंने कहा की हम प्रदर्शनकारियों को पहले चेतावनी देंगे वाटर कैनन का इस्तेमाल करेंगे, आंसू गैस की घोसड़ा करेंगे और अगर उसके बाद भी जरुरत हुई तो लाठीचार्ज भी करेंगे उन्होंने कहा की वायरल वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है क्योकि उसका बस एक हिस्सा ही दिखाया जा रहा है जिसमे लाठीचार्ज की बात हो रही है वीडियो के केवल एक चुनिंदा हिस्से को ही लीक किया गया है।’

सभी किसानों को किया गया रिहा

इस हंगामे के बाद कई किसानो को गिरफ्तार कर लिया गया था जिसके बाद किसान नेता गुरनाम सिंह ने बसताड़ा टोल पहुंचकर सभी साथी किसानों को रिहा कराने के लिए प्रदेश भर में सड़कों को जाम करने की बात कही, इसके बाद सिरसा, पानीपत समेत कई जिलों में किसानों ने रोड को जाम भी कर दिया, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना भी करना पड़ा और देर शाम पुलिस ने हिरासत में लिए गए सभी किसानों को रिहा भी कर दिया।

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