रुपाणी का इस्तीफ़ा, भूपेंद्र पटेल होंगे गुजरात के नए सीएम जानिए पूरी ख़बर।

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बीतें 1 मई को गुजरात राज्य के स्थापना के 60 साल पूरे होने के मौके पर मैंने योजना नामक अंग्रेज़ी मैगज़ीन में बतौर मुख्यमंत्री विजय रुपाणी का लिखा लेख पढ़ा था, जिसमें उन्होंने गुजरात को विकास का पर्याय बताया था। आज उनके द्वारा दिए गए इस्तीफे पर आर्टिकल लिख रही। यकीनन राजनीति और सत्ता के गणित का कोई फॉर्मूला नहीं। यहां कुछ भी निश्चित नहीं। कल तक जिसके हाथ में गुजरात की सत्ता की भाग दौड़ संभालने की जिमेदारी थी आज कार्यकाल बिना पूरे हुए बिना ही इस्तीफ़ा उसके हाथ में है।
ऐसा पहली बार नहीं जब किसी मुख्यमंत्री ने कार्यकाल पूरा हुए बिना अपना इस्तीफ़ा दिया हो कई बार पार्टी में आपसी मदभेद के कारण भी नेताओं का मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने की खबरें आती है। लेकिन पार्टी में सब कुछ ठीक चल रहा हो, और राज्य में आगामी चुनाव आने वाले हो और ऐसे वक्त में मुख्यमंत्री द्वारा इस्तीफ़ा दे दिया जाए तो ख़बर पर बहस होना लाज़मी है। जब से रुपाणी के इस्तीफ़ा की ख़बर आई है तब से राजनीतिक गलियारे से लेकर मीडिया तक खबरों का हिस्सा बनी हुई है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस्तीफ़ा देना, जिम्मेदारी दी नहीं गई या खुद जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे रुपाणी बीते दिन रुपाणी ने बतौर मुख्यमंत्री पद से “पार्टी के प्रति दायित्व का हवाला” दे कर इस्तीफ़ा दे दिया।
आपको बता दें, विजय रुपाणी ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफ़ा सौंपा।
मीडिया से मुखातिब हो कर रुपाणी ने कहा, “मैं भारतीय जनता पार्टी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि मुझ जैसे साधारण कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री पद की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई। मैं प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं। मोदी जी के मार्गदर्शन से निसंदेह गुजरात सदैव विकास के पथ पर अग्रसर रहेगा।” आगे उन्होंने पार्टी के सन्दर्भ में कहा कि समय के साथ कार्यकर्ताओं के दायित्व बदलना बीजेपी की परंपरा रही है। रुपाणी ने अपने इस्तीफे को पार्टी के कार्य भर का हवाला दिया। हालांकि आपसी मदभेद की कोई भी ख़बर सामने नहीं आई है। लेकिन सुबें में जब विधानसभा चुनाव आने वाला हो तो ऐसे ने मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा देना कितना उचित है ? आगामी विधानसभा चुनाव होने वाले है जिस वक्त चुनावी खेल में शामिल होना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए ऐसे वक्त में वो रिंग से बाहर जाते दिख रहे। सवाल यही है की रुपाणी ने इस्तीफ़ा क्यों दिया ? आखिर क्या वजह थी इस फेरबदल की ? क्या इस्तीफ़ा देना खुद रुपाणी का ही फैसला था या हाई कमान का फैसला था?

आखिर मोदी साह की रणनीति क्या है ?

पिछले महीने की मोदी शाह के बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भरी फेरबदल की गई थी। मोदी सरकार के कई बड़े मंत्रालय में मंत्रियों की बदली की गई। कहा गया की मोदी सरकार ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मंत्री मंडल के पुर्जे ठीक किए है शिक्षा मंत्रालय से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय विभाग, खेल मंत्रालय कई बड़े मंत्रालय में मंत्रियों की फेरबदल की गई। ये दावा किया गया की सभी मंत्रालयों को सही चेहरे की जरूरत है। कुछ ऐसा ही बदलाव गुजरात में भी किया गया। इसमें कोई संदेह नहीं है की बीजेपी सरकार ने आगामी विधानसभा चुनावों की पूरी तैयार दिखती है लेकिन क्या मंत्रायल से लेकर मुख्यमंत्री पद में फेरबदल ही एक रास्ता है पार्टी की साख मजबूत करने का।

रुपाणी के इस्तीफ़े पर विपक्ष का सरकार पर निशाना

जैसे ही विजय रुपाणी के अचानक इस तरह इस्तीफ़े की ख़बर आई तब से ही विपक्ष सरकार पर निशाना साध रही।
कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल ने इसे बीजेपी की गुमराह करने वाली राजनीति कहा।


पटेल ने कहा की गुजरात के इस फेरबदल के जरिए बीजेपी सरकार गुजरात के नाकामियों को छुपाने का प्रयास कर रही। ये बीजेपी सरकार की राजनीति का हिस्सा है।


आपको बता दें, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार को घेर रही। विपक्ष आरोप लगा रही कि, सरकार जिम्मेदारी न लेकर मुद्दों से पल्ला झाड़ रही।

रुपाणी सरकार का रिपोर्ट कार्ड।

विजय रुपाणी के काल में कई सारे विफलताएं देखने को मिलती है। कोरोना महामारी के समय गुजरात सरकार में रुपाणी बतौर मुख्यमंत्री पद पर थे। लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी को अच्छे से नही निभाया गुजरात ने ऑक्सीजन की कमी से भारी मौत हुई कोविड क्राइसेस की नाकामियों से केंद्र रुपाणी के नेतृत्व से नाखुश था। आपको बता दें, बीजेपी शासित राज्य होने के कारण विपक्ष ने इसके चलते मोदी सरकार को भी घेरा गया था। रुपाणी भले ही गुजरात को “विकास” का पर्याय बताए लेकिन सच इसके इतर दिखती है। यही वजह है की मोदी सरकार ने गुजरात के लिए नए चेहरे की तलाश है। जो जनता से जुड़ सके, जिसके नेतृत्व में गुजरात का विकास हो और आगामी चुनाव में इसका सकारात्मक प्रभाव पड़े।

भूपेंद्र पटेल होंगे गुजरात के ने मुख्यमंत्री।

आज दोपहर ही गांधीनगर में बीजेपी विधायक दल की बैठक की ख़बर आई और शाम तक गुजरात के नए मुख्यमंत्री के लिए भूपेंद्र पटेल के नाम पर मुहर लगा दी गई । इस फैसले का स्वागत अमित शाह से लेकर सुब्रमण्यन स्वामी ने तक स्वागत किया। अमित शाह ने ट्वीट करके बधाई दी और इस फैसले का स्वागत किया। अब इस बदलाव से पार्टी की छवि पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा इसका परिणाम आने वाले वक्त में ही पता चलेगा।

तो क्या यही है मोदी – शाह का फॉर्मूला ?

ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब बीजेपी शासित प्रदेशों में सरकार बदली गई हो। आपको बता दें, पिछले महीने बीजेपी शासित राज्यों में भी मंत्रियों ने बतौर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया। जिसमे राज्यों की बात करे तो ये राज्य थे, कर्नाटक, उत्तराखंड और असम जैसे राज्य शामिल है। कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा, उत्तराखंड में तीरथ सिंह रावत और असम में सर्वानंद सोनोवाल ने हाल ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था। और अब गुजरात मे विजय रुपाणी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। सवाल यही है की क्या यही है मोदी – शाह का चुनावी जीत का फॉर्मूला?

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