केजरीवाल सरकार को मिला झटका, केंद्र ने दिल्ली सरकार द्वारा 1000 लो-फ्लोर बसों की खरीद पर सीबीआई जांच का दिया आदेश।

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अरविंद केजरीवाल सरकार को केंद्र की तरह से मिला झटका, 1000 लो फ्लोर बसों की खरीद में गड़बड़ी के मामले में अब जांच करेगी सीबीआई, गृह मंत्रालय ने गुरुवार की 1000 लो फ्लोर बसों की खरीद की सीबीआई से प्रारंभिक जांच की सिफारिश की। खरीद में भ्रष्ट्राचार का मामला लगातार दिल्ली विधानसभा में बीजेपी द्वारा उठाया जा रहा था, बीजेपी ने 1000 बसों की खरीद के मामले में करोड़ों का घोटाले का आरोप दिल्ली सरकार पर लगाया था और जिसकी मांग की जा रही थी की सीबीआई जांच हो। आपको बता दे की दिल्ली में हजार लो फ्लोर बसे है जिसकी खरीद की गड़बड़ी मे एक लंबे समय से आरोप लग रही थीं। जिस की जानकारी गृह मंत्रालय ने खुद मुख्य सचिव को दी है।

भाजपा से रोहिणी विधायक विजेंद्र गुप्ता ने खरीद और रखरखाव और अनुबंधों की शर्तों में अनियमितताओ का आरोप लगाया था। गुप्ता ने कहा था की जनवरी 2021 में दिल्ली सरकार ने 980 करोड़ रुपए की लागत वाली हजार लो फ्लोर बसों का वर्क ऑर्डर दिया था। उन्होंने कहा कि खरीद के आदेश के साथ ही बसों के वार्षिक रखरखाव के लिए 350 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का टेंडर भी निकाला। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह भी उन्हीं बस आपूर्तिकर्ताओं को सौंपा गया। जून में उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने एएमसी में प्रक्रियात्मक “खामियां” पाई थी और इसे खत्म करने की सिफारिश की थी।

क्या कहा केजरीवाल ने।

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने इसे उत्पीड़न करार देते हुए सीबीआई जांच के गृह मंत्रालय के आदेश की आलोचना की और कहा कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। मामले की पूरी तरह से जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था, जिसने क्लीन चिट दे दी थी। यह आप के खिलाफ राजनीति से प्रेरित साजिश है।”
उन्होंने कहा, “भाजपा दिल्ली के लोगों को नई बसें लेने से रोकना चाहती है। पूर्व में भी केंद्र सरकार ने सीबीआई का इस्तेमाल कर दिल्ली सरकार को परेशान करने की कोशिश की है, लेकिन एक बार भी उनका प्रयास सफल नहीं हुआ है क्योंकि कभी कोई सच्चाई नहीं रही। उनके किसी भी आरोप के लिए। दिल्ली सरकार बदनामी की राजनीति में विश्वास नहीं करती है, यह केवल सुशासन में विश्वास करती है और अपने वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में, दिल्ली में 6,693 बसें हैं – 3,760 डीटीसी और 2,933 क्लस्टर बसें। डीटीसी द्वारा नई बसों की आखिरी खरीद 2008 में की गई थी।

जवानों को ड्यूटी में ले गई बसों को वापस मांगा दिल्ली सरकार ने।

किसान आंदोलन में आवाजाही के लिए अलग अलग सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही बसों को दिल्ली सरकार ने वापस करने को कहा, परिवहन विभाग ने डीटीसी को निर्देश देकर दिल्ली पुलिस को मुहैया कराई गई 576 बसे लौटने के लिए कहा था। बता दे की दिल्ली में किसान आंदोलन के मद्देनजर रखते हुए राज्य की सीमाओं पर सुरक्षा के लिए भरी संख्या में पोलिस फोर्स तैनात किए गए थे। क्यूंकि किसान आंदोलन उग्र रूप लेता हुआ दिख रहा था। और आंदोलनकारी किसानों को आम आदमी पार्टी का समर्थन भी था जब गाजीपुर बॉर्डर पर बिजली पानी की कटौती की गई थी तो आम आदमी पार्टी ने किसानों के लिए मूल भूत सुविधायो का प्रबंध भी किया था। और दिल्ली के डिप्टी सीएम खुद किसानों से मिलने पहुंचे थे। और बसों को वापस मगाने का कारण यही था।

AAP पर भड़के आदेश गुप्ता।

दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा दिल्ली सरकार के डीटीसी बस खरीद घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश को अरविंद केजरीवाल सरकार के पतन की शुरुआत समझिए। आदेश गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की जनता को आज भी अरविंद केजरीवाल का 2013 का बयान याद है

जिसमें उन्होंने कहा था कि, मैं एक भी दागी को विधानसभा में नहीं बैठने दूंगा पर आज तो पूरी केजरीवाल सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है। सरकार का मुखिया होने के नाते डीटीसी बस घोटाले के लिए अरविंद केजरीवाल नैतिक रूप से जिम्मेदार हैं उन्हें अब सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं। अध्यक्ष ने कहा कि सीबीआई जांच का आदेश होना कोई आम बात नही। 2010 में कॉमनवेल्थ गेम से जुड़े घोटाले का आदेश हुआ था। पर तब किसी मंत्री पर सीधा आरोप नहीं था दिल्ली की जनता ने शीला दीक्षित सरकार को माफ नहीं किया और 2013 में सत्ता से बेदखल कर दिया था।

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