आज़ादी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, नही जानते होगे आप, आज़ादी के जश्न में नही शामिल हुए महात्मा गांधी।

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आज हमारा देश 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा। पिछले 74 सालों में भारत ने बहुत तरक्की की जिसकी चर्चाएं हम सबके जुबान में होती है, लेकिन इन चर्चाओं ने बीच हम भूल जाते है की न जाने कितनो ने अपने प्राणों को आहुति दी तब जाके हमें आजादी मिली। लेकिन वही 15 अगस्त 1947 को कुछ ऐसी भी घटनाएं हुई थी जिनके बारे में आज बस कुछ चंद लोग ही जानते है, लेकिन आज हम आपको वो सारी बाते बताएंगे जो अपने पहले कभी न सुनी।

(1)-15 अगस्त 1947 ये वही दिन है जिस दिन हमारे देश को आजादी मिली, आजादी के इस मौके पर हर कोई खुश था लेकिन वहीं हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जश्न के इस माहौल में शामिल न हो सके, क्यों की वो दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर बंगाल के नोआखली में थे, जहां वो हिंदू और मुस्लिमों के बीच हो रहे सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन पर बैठे थे। जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महात्मा को इस खुशी के मौके पर आमंत्रित करने के लिए एक खत लिखते है, खत में लिखते है हमारा पहला स्वाधीनता दिवस है हम सब चाहते है आप राष्ट्रपिता है और आप इसके शामिल होकर इस खुशी के मौके को और खुशनुमा बनाए। और इस खत के जवाब में गांधी जी लिखते है, की जब कलकत्ता में हमारे हिंदू और मुस्लिम भाई आपस में लड़ रहे है एक दूसरे की जान ले रहे है, ऐसे में मै जश्न कैसे मनाऊं, मै दंगा रोकने के लिए अपनी जान दे दूंगा और वो नही आए।

(2)- हमारा देश आजाद तो हो गया था और आजादी के जश्न के लिए 15 तारीख तय तो हो गई थी, लेकिन ज्योतिषों ने इसका खूब विरोध किया था। कारण था इस दिन का अशुभ और अमांगलिक होना। लेकिन लॉर्ड माउंटबेटन चाहते थे कि तारीख ना बदले तो ज्योतिषों ने बीच का रास्ता निकालते हुए 14 और 15 के मधरात्रि का समय तय किया। अंग्रेजी समय के अनुसार रात 12 बजे के बाद अगला दिन लग जाता है, जबकि भारतीय मान्यताओं के मुताबिक सूर्योदय के बाद अगला दिन माना जाता है ऐसे में आजादी के जश्न के लिए अभिजीत मुहूर्त को चुना गया जोकि 11 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 29 मिनट तक रहने वाला था। और इसी के बीच में पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपना भाषण पूरा करना था और उन्होंने ऐसा ही किया। और इस ऐतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी’ दिया था। इस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना था लेकिन महात्मा गांधी ने इसे नहीं सुना क्योंकि उस दिन वे जल्दी सोने चले गए थे।

(3)- इस दिन को जब भी याद किया जाता है तब तब याद आता है दो मुल्कों के बटवारे। लेकिन इसी दिन जन – धन संपत्ति और कई ऐसे बंटवारे हुए थे जिनपर यकीन कर पाना मुश्किल है। इस दिन भारत के सरकारी दफ्तरों में मौजूद सरकारी संपतियों का भी बंटवारा हुआ, टेबल कुर्सी और टाइम राइटर तक का हिसाब हुआ। लेकिन वही एक बंटवारा ऐसा भी था जो hme सोचने पर मजबूर कर देता है जो था लाइब्रेरी के किताबों का बंटवारा, कुछ इतिहासकारों का कहना है लाइब्रेरी में रखी हुई इनसाइक्लोपीडिया को आधा आधा बांटा गया था। और इसी तरह देश में मौजूद शराब का कारोबार, इमारतों, आई नदियों का भी बंटवारा हुआ।

(4)- भारत के आजादी के दो लोगो की अहम भूमिका थी महात्मा गांधी और लॉर्ड माउंटबेटन लेकिन आपको पता होगा की इन दोनो लोगो की राजनीतिक कारणों की वजह हत्या कर दी गई थी, आप जानते है की 1948 में महात्मा गांधी की हत्याबकार दी गई थी लेकिन जब लॉर्ड माउंटबेटन साला 1979 में अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आयरलैंड के एक गांव में गए हुए थे और 27 अगस्त को मछलियां पकड़ने बोट से समुद्र में गए तो उनके वोट में जोरदार धमाका हुआ और इस धमाके में लॉर्ड माउंटबेटन को मौत हो गई। इस वोट में आइरिश रिपब्लिकन आर्मी ने बम लगा रखा था, ये वही लोग है जो आयरलैंड में ब्रिटिश हुकूमत की लड़ाई लड़ी थी। और लॉर्ड माउंटबेटन की हत्या कर उसे अपना बदला बताया।

(5)- आपको पता होगा की स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से झंडा फहराते है लेकिन 15 अगस्ट 1947 को आजाद भारत में ऐसा नहीं हुआ था। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू 16 अगस्त 1947 को झंडा फहराया था।

(6)- 15 अगस्त को सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पांच और देश भी आजाद हुए थे। इनमे लाइखटेंसेटाइन, साउथ कोरिया, नॉर्थ कोरिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, बहरीन शामिल है। लाइखटेंसेटाइन साल 1806 में जर्मनी से आजाद हुआ। साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया साल 1945 में जापान से आजाद हुएं। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो साल 1960 में फ्रांस से आजाद हुआ और बहरीन साल 1971 में ब्रिटेन से आजाद हुआ। और इस अगस्त के महीने में भारत के आलावा 28 और देश भी अपना स्वंत्रंता दिवस मनाते है।

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