‘ताजिकिस्तान’ ने ‘पकिस्तान’ को जमकर सुनाया- तालिबान को भी दी कड़ी चेतावनी

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सेंट्रल एशियाई देश ताजिकिस्‍तान के दौरे पर पहुंचे पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री ‘शाह महमूद कुरैशी’ को ताजिकिस्तान के राष्‍ट्रपति ‘इमोमली राहमोन’ ने जमकर सुनाया है। राष्‍ट्रपति इमोमली राहमोन ने पाकिस्तान के सामने तालिबान को चेतावनी भी दे दी है।

अफगानिस्‍तान से सटे और अफगानिस्तान के पडोसी सेंट्रल एशियाई देश ताजिकिस्‍तान ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर तालिबान के आतंकियों को स्‍पष्‍ट रूप से चेतावनी दी है और कहा कि उनका देश दमन के जरिए सत्‍ता में आई तालिबान की सरकार को मान्‍यता नहीं देगा। ताजिकिस्तान आज के समय मे ऐसा खुले रूप से तालिबान को अफगानिस्तान सरकार की मान्यता न देने वाला पहला देश भी बन गया है। ताजिकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति इमोमली राहमोन तालिबान को मान्‍यता दिलाने की मुहिम पर निकले पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के साथ बातचीत में उन्‍हें खरी-खोटी सुना दिया। हाल ही में पकिस्तान के विदेश मंत्री ‘शाह महमूह कुरैशी’ एक महत्वपूर्ण दौरे पर ताजिकिस्तान गए और वहाँ के विदेश मंत्री और राष्ट्रपति से भी मुलाकात किया। पकिस्तान जो की काफी लम्बे वक़्त से तालिबान का समर्थन करता आया है, वो आजकल तालिबान की सरकार को मान्यता दिलाने जगह जगह पहुँच कर और अपने ही देश का दुनिया भर में बेज़्ज़ती कराने पर तुला हुआ है, ताजिकिस्तान के दौरे पर भी पकिस्तान को खरी-खोटी ही सुनने को मिला।

ताजिक मूल के लोगों को भी दी जाए भागीदारी

ताजिकिस्तान के राष्‍ट्रपति ने कहा कि “तालिबान ने कहा था कि सत्‍ता में आने पर अन्‍य राजनीतिक ताकतों को भी देश में व्‍यापक भागीदारी दी जाएगी लेकिन वे अब एक इस्‍लामिक अमीरात बना रहे हैं, राष्‍ट्रपति इमोमली राहमोन का यह सख्‍त बयान बेहद अहम माना जा रहा है क्‍योंकि अफगानिस्‍तान की सीमा ताजिकिस्‍तान से मिलती है, अगर अफगानिस्‍तान में स्थति और ज्यादा बिगड़ती है तो इसका सीधा असर ताजिकिस्‍तान पर पड़ना तो तय बात है।”

सेंट्रल एशियाई देश ताजिकिस्तान की देश/विदेश नीति

ताजिकिस्तान सेंट्रल एशिया में स्थित देश है जिसकी राजधानी दुशानबे शहर है और यहाँ की भाषा और लोगो को ताजिक कहा जाता है, लगभग 93 लाख की जनसँख्या वाला देश जहाँ पर लगभग 98 फीसदी लोग इस्लाम धर्म को मानते हैं इसके बावजूद भी यह देश संविधानिक रूप से इस्लामिक देश नहीं है 98% मुस्लिम आबादी होने के बावजूद भी 2017 में ताजिकिस्तान की सरकार ने एक नियम पास किया था जिसके अंतर्गत सरकार ने देश भर में हिजाब को बैन कर रखा है और तो और वह पर दाढ़ी बढ़ाने पर भी सरकार द्वारा फाइन लगा दिया जाता है। आपको बता दें की ताजिकिस्तान की सरकार ने कई बार खुले मंच पर यह भी कहा है की वो अपने देश में मॉडरेट इस्लाम को फॉलो करना चाहते है। ताजिकिस्तान को वो लोग कट्टर इस्लामिक देश नहीं बनना देने चाहते और वो नहीं चाहते की इस कट्टरपंथ की वजह से ताजिकिस्तान भी वैसा देश बन जाए जैसा की आज अफगानिस्तान बन रहा है। बता दे की ताजिकिस्तान इस्लामिक सहयोग संगठन (Organisation of Islamic Cooperation- OIC) का सदस्य भी है और कई बार OIC के साथ मिलकर खुले मंच पर वह फ्रांस के बुरखा बैन जैसे मुद्दों पर विरोध करता भी नजर आया है।

अमरुल्लाह सालेह और अहमद मसूद ने किया तालिबान के खिलाफ जंग का ऐलान तो वही ताजिकिस्तान ने भी दे डाली तालिबान को चेतावनी

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के देश छोड़ देने के बाद उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने ऐलान किया कि ‘वे अफगानिस्तान के संविधान के मुताबिक, राष्ट्रपति की गैरमौजूदगी में देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति बन गए हैं,उन्होंने पंजशीर घाटी से तालिबान के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है’ दूसरी ओर, अहमद शाह के बेटे अहमद मसूद ने कहा है कि वे अपने पिता के नक्शेकदम पर चलने के लिए तैयार हैं, मुजाहिद्दीन के लड़ाके एक बार फिर तालिबान से जंग के लिए तैयार रहें, अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उन्होंने एक फ्रांसीसी पत्रिका के लिए एक लेख में ‘तालिबान के खिलाफ जंग’ का ऐलान किया है ऐसा माना जा रहा है कि अफगानिस्तान में गृह युद्ध जैसे आसार भी नजर आ सकते है। ऐसे में तालिबान के खिलाफ अमरुल्लाह सालेह और अहमद मसूद ने जंग छेड दी है। और ताजिकिस्तान ने भी तालिबान को जिस प्रकार से चेतावनी दी है वो कहीं न कहीं अफगानिस्तान की मौजूदा हालात देखकर जरूरी भी है और ठीक उसी प्रकार से और भी देशों को सोचने की जरूरत है।

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