UP चुनाव 2022: क्या TINA फैक्टर से इस बार विधानसभा चुनाव जीत पाएंगे अखिलेश यादव ?

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UP के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछले विधानसभा चुनाव के अनुभवों के आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ज्यादा सतर्क नज़र आ रहे है, उनका मानना है की पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी हार का सबसे बड़ा कारण, बड़े पार्टियों के साथ गठबंधन करना था। अखिलेश यादव ने पिछले विधानसभा के चुनाव में हुए गठबंधन को ही ,अपने हार का सबसे बड़ा वजह मानते है, वह मानते है की गठबंधन करने का ही खामियाजा समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है, इसलिए उन्होंने अब की बार आने वाले विधानसभा चुनाव में छोटे दलों के साथ मिलकर आगे आने का फैसला किया है, इस फैसले को देखकर दरअसल उनके आस-पास के लोगों का कहना है की, अखिलेश यादव के दिमाग में TINA फैक्टर बैठ गया है। ऐसा माना जा रहा है की इस बार अखिलेश यादव को TINA फैक्टर पर ज्यादा भरोसा है, बता दें की ये TINA फैक्टर किसी पार्टी या किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं है, बल्कि यह एक टर्म है जिसका मतलब ‘There is no Alternative’ है।

आखिर क्या है ये TINA फैक्टर

TINA फैक्टर को ठीक से समझने क लिए आपको पिछले कुछ चुनावों के नतीजे को भी समझना होगा, जिस प्रकार से जनता के सामने किसी पार्टी को वोट न देने का एक विकल्प रहता है, उदाहरण के तौर पर हाल ही में हुए पिछले कुछ चुनावों को देखते है, पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव में ममता बनर्जी, भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विकल्प जनता के सामने थी, तो इस प्रकार से जनता की नजर में ममता बनर्जी के साथ TINA फैक्टर था, ठीक इसी प्रकार से अगर हम बात करे दिल्ली की तो भाजपा के खिलाफ यह फैक्टर अरविन्द केजरीवाल के साथ नजर आता है, बिहार में 2015 के चुनावों को देखा जाए तो यह फैक्टर नीतीश कुमार के साथ नजर आता है, यानी की किसी मजबूत पार्टी या सत्ता में रहने वाली पार्टी के खिलाफ सबसे ज्यादा मजबूत विकल्प। अखिलेश यादव का मानना है की उत्तर प्रदेश में जनता के सामने वो ही योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सबसे बड़े विकल्प है। इसी “टीना फैक्टर” को मानते हुए अखिलेश यादव आगामी विधानसभा के चुनाव में अपने आप को और ज्यादा मजबूत करने के लिए छोटे दलों को अपने साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं, इस बार वो किसी बड़े पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करने वाले, अखिलेश यादव का मानना है की बड़ी पार्टियों के साथ गठबंधन करना हमारे पार्टी की सबसे बड़ी भूल थी।


बता दें की अब तक सपा के साथ दो छोटे दल जुड़ चुके हैं। राष्ट्रीय लोक दल पिछले चुनावों तक समाजवादी पार्टी के साथ ही थी लेकिन आने वाले चुनावों के लिए “जयंत चौधरी” ने अबतक कोई संकेत नहीं दिए है। इस बार के विधानसभा चुनाव में किसान आंदोलन के वजह से किसानो की भूमिका अहम होगी, इस चुनावी माहौल में जाहिर है जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ज्यादा से ज्यादा सीटों की उम्मीद कर रहे होंगे पर अखिलेश यादव ने यह साफ़ कर दिया है की वो इस बार छोटे दलों को ज्यादा सीट न देकर खुद के समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओ पर ज्यादा भरोसा जताएंगे।

अखिलेश के पुराने साथी हुए, अखिलेश से दूर

जाहिर है की अखिलेश यादव को आगामी विधानसभा चुनाव देखते हुए अपने कई पुराने साथियो की कमी महसूस हो रही है, जिस तरह से पिछले चुनावों में उनके चाचा शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के झगड़े ने सियासी रूप ले लिया था उन्ही कारणों की वजह से अखिलेश इस बार के चुनाव में फ़िलहाल परिवार के लोगो को आगे नहीं ला रहे है, तो वही दूसरी तरफ देखा जाए तो अखिलेश आजम खान के बीमार होने के कारण से भी फिलहाल अकेले ही नजर आ रहे है और अब मुलायम सिंह यादव का भी वो दबदबा पार्टी में नजर नहीं आता है, साथ ही आजम खान के परिवार के तरफ से भी पार्टी के लिए अब थोड़ी नाराजगी नजर आ रही है इस नाराजगी का कारण पार्टी का रवैया है, जो की आजम खान के बीमार होने के बाद से है। अगर चुनाव से पहले ये नाराजगी प्रत्यक्ष रूप से सार्वजनिक तौर पर बाहर आ जाती है तो इसका खामियाजा अखिलेश यादव को आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।

तो क्या अब यूपी में मायावती हो गई है कमजोर

बसपा सुप्रीमो मायावती के हिस्से में पिछले विधानसभा चुनावों में भले ही कोई सीट नहीं आई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीती में मायावती एक बड़े नेता के तौर पर जानी जाती हैं। इस बार के चुनाव में अखिलेश यादव खुद को मजबूत पार्टी और बसपा को एक कमजोर पार्टी के रूप में देखने की गलती कर सकते है पर बता दें की पिछले चुनावों में भी भाजपा, बसपा के वोटबैंक में कुछ खास बदलाव नहीं कर पाई थी, गठबंधन को लेकर मायावती की तरफ से फिलहाल कोई भी संकेत नहीं दिख रहे है।

जानें किन दलों से हो रही है आगामी चुनाव को लेकर अखिलेश की बातचीत

अखिलेश यादव ने यह साफ़ कर दिया है की वो इस बार छोटे दलों को ज्यादा सीटें न देकर समाजवादी के कार्यकर्ताओ पर ज्यादा भरोसा जताएंगे। लेकिन अब अखिलेश जिन दलों से बातचीत कर रहे हैं, वह सभी दल अखिलेश यादव से उनकी उम्मीद से ज्यादा सीटों की मांग कर रहे है। पिछले दिनों अखिलेश यादव की मुलाकात “ओम प्रकाश राजभर” के साथ हुई थी, लेकिन उनकी भी सीटों को लेकर, अखिलेश यादव के उम्मीदों से ज्यादा मांग थी, जिसके वजह से वो फैसला नहीं ले पाए, आपको बता दें की पहले चुनावों में समाजवादी पार्टी के साथ रहने वाली निषाद पार्टी भी अब भाजपा के साथ है।

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