उत्तर प्रदेश सरकार वापस लेगी आजम खान के जौहर ट्रस्ट की 173 एकड़ जमीन। ट्रस्ट के सदस्यों पर कम से कम 30 मुकदमे है दर्ज

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आजम खान जो की अभी भी कानूनी शिकंजे में फंसे हुए हैं, उनकी मुश्किल अब और बढ़ती नजर आ रही है, उनके जौहर ट्रस्ट के लगभग हर सदस्य पर 30 मुकदमे दर्ज हैं। इन सभी सदस्यों पर पुलिस चार्जशीट भी लगा चुकी है और अब अदालत की कार्रवाई चल रही है। अतिरिक्त जिला सरकारी वकील अजय तिवारी ने बताया की जमीन वापस लेने का आदेश एसडीएम जगदंबा प्रसाद गुप्ता द्वारा पारित किया गया था जब अदालत ने ये पाया की जौहर ट्रस्ट राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन नहीं कर रहा था।

अब जौहर ट्रस्ट के सभी सदस्य मुकदमेबाजी में फंस गए हैं, सभी सदस्यों पर कम से कम 30 मुकदमे दर्ज हैं और इनके खिलाफ पुलिस चार्जशीट भी लगा चुकी है फ़िलहाल अदालत की प्रक्रिया चल रही है। बता दे आजम खान पिछले करीब 17 महीनों से जेल में बंद है और अब उनके ट्रस्ट के सदस्यों को भी कानून जल्द ही हिरासत में ले सकता है।

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान के लिए एक ड्रीम प्रोजेक्ट है ऐसा आजम खान का कहना है। आजम खान इसके संस्थापक होने के साथ ही साथ कुलाधिपति भी हैं। इस यूनिवर्सिटी का संचालन आजम खान का ही ट्रस्ट करता है। इस ट्रस्ट का नाम मौलाना मोहम्मद अली जौहर है। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष खुद आजम खान हैं तो उनकी पत्नी डॉ तजीन फातमा इस ट्रस्ट की सचिव है। और इस ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष उनकी बहन निखत अफलाक हैं। और उनके दोनों बेटे अजीब और अब्दुल्ला इस ट्रस्ट के सदस्य है, और इस ट्रस्ट में शामिल दूसरे लोग भी आजम खान के काफी करीबी माने जाते हैं। इस ट्रस्ट के कुल 11 सदस्य थे जिनमें से 1 सदस्य अब इस दुनिया में नहीं हैं। ट्रस्ट के सभी सदस्य जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन कब्जाने के मुकदमों में फंसे हैं। इन सभी पर कम से कम 30 मुकदमे दर्ज हैं। बता दें 2019 में अजीम नगर थाने में दर्ज हुए इन सभी मुकदमों में केवल आजम खान ही नामजद हुए थे लेकिन पुलिस की छानबीन में लगभग सभी सदस्यों के नाम सामने आए थे। पुलिस अधीक्षक शगुन गौतम ने यह बताया की यूनिवर्सिटी के लिए जमीन कब्जाने के सन्दर्भ में 30 मुकदमा को दर्ज किया गया था, इनमें सांसद आजम खान को नामजद किया गया था। लेकिन छानबीन के दौरान पता चला की यूनिवर्सिटी का संचालन जौहर ट्रस्ट करता है इसलिए ट्रस्ट के सभी सदस्यों को आरोपी पाया गया है और इन सभी पर मुकदमे भी दर्ज कराए गए हैं और पुलिस की तरफ से सभी सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई है अब यह पूरा केस अदालत में चल रहा है।

आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी का गेट भी टूटेगा और इस पर आया सारा खर्च खुद आजम खान भरेंगे, जानिए क्या है वजह

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का गेट रामपुर जिला प्रशासन तोड़ने वाला हैं क्योंकि यूनिवर्सिटी का यह गेट पीडब्ल्यूडी की सड़क पर कब्जा करके बनाया गया है। अदालत ने भी गेट तोड़ने की कार्रवाई को लेकर सहमति दे दी है। आजम खान की मुश्किलें दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं अब उनके विश्वविद्यालय का गेट रामपुर जिला प्रशासन तोड़ेगा और ऊपर से तोड़ने का खर्च भी आजम खान को ही देना पड़ेगा। और साथ ही साथ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने का भी जुर्माना आजम खान को ही देना होगा। रामपुर के जिला प्रशासन ने एक करोड 63 लाख 80 हजार का जुर्माना और आजम खान को नोटिस भी जारी किया था।

आजम खान के याचिका को जिला अदालत ने भी खारिज कर दिया था।

एसडीएम कोर्ट का फैसला आने के बाद आजम खान ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी। लेकिन इस केस को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालत में दाखिल करने के लिए कहा था। जिला अदालत ने एसडीएम कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आजम खान की याचिका को फिर से खारिज कर दिया इसी के साथ जौहर यूनिवर्सिटी के गेट को तोड़ने का रास्ता एकदम साफ हो गया था जिसे लेकर शुरू से ही विवाद बना था।

शुरू से ही विवादों में घिरी रही थी आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी।

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट है। उसे बनाने के लिए आजम खान पर गरीब किसानों के जमीन कब्जाने के आरोप हैं। बता दें कि 26 किसानों ने आजम खान पर मुकदमे भी दर्ज कराए थे। रामपुर जिला प्रशासन ने सांसद आजम खान के खिलाफ भू माफिया के कई केस भी दर्ज किए थे। आजम खान पर कई और जमीनों को कब्ज़ा कर उस पर यूनिवर्सिटी के बाउंड्री बनवाने का भी आरोप था, हालांकि रामपुर जिला प्रशासन ने बाउंड्री वॉल तोड़कर उन सभी जमीनों को 2019 में ही कब्ज़ा मुक्त करा लिया था ।

आजम खान पर कार्रवाई करने वाले DM को केंद्र सरकार ने दिया था इनाम

आजम खान और उनके परिवार के द्वारा कब्ज़ा की गई जमीनों पर कार्रवाई करने वाले आईएएस अधिकारी को केंद्र सरकार द्वारा इनाम के रूप में 2 वर्ष और अधिक प्रतिनियुक्ति दिया गया। रामपुर के डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने आजम खान और उनके परिवार के ऊपर सक्रिय ढंग से किया था और अभी की वो अपने काम पर लगे हुए है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद अब वो 2 साल और यूपी में बने रहेंगे, आपको बता दें की आंजनेय कुमार सिंह की प्रतिनियुक्ति भी अखिलेश यादव के सरकार में ही हुई थी ।

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