सरकार और विपक्ष में क्यों छिड़ी है जंग, आखिर क्या है पेगासस, क्यों नाम दिया जा रहा पेगासस जासूसी कांड।

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भारतीय राजनीति में आजकल क्यों हलचल मचा हुए है आखिर क्या है पेगासस जिसकी वजह से विपक्ष सरकार पर उंगली उठा रहा।

क्या है पेगासस।

सबसे पहले हम आपको पेगासस शब्द का मतलब बताते है ये शब्द आया है ग्रीक मायथोलॉजी से एक मैथोलॉजिकल क्रिएटर एक सफेद रंग का घोड़ा जिसपर पंख होते थे इसे पेगासस कहा जाता था। लेकिन आज के इस आधुनिक जमाने में पेगासस एक (Spyware) हैं जोकि एक खतरनाक वायरस है जो खुफिया तरीके से आपके स्मार्टफोन या कंप्यूटर में घुस जाते है और आपकी सारी जानकारी किसी और को दे देते है। मतलब की खुफिया तरीके से आपके ऊपर जासूसी करना।

आपके फोन तक जाता कैसे है पेगासस।

पहले क्या होता था की आपको एक लिंक भेजा जाता था आपके फोन या कंप्यूटर पर जिसपर आप अगर क्लिक करते थे तो ये आपके फोन में घुस जाता था। लेकिन नही अभी पेगासस को इन सब को जरूरत नहीं है, आपके फोन तक घुसने के लिए इसे सिर्फ आपके फोन नंबर तक पता होना चाहिए ये आपके फोन पर एक मैसेज भेजेंगे या एक मिस्ड कॉल भले ही आप फोन को उठाए भी ना फिर भी ये आपके फोन में चला जाता है। ये एप्पल के आईओएस और एंड्रॉयड दोनो पर काम करता है और अगर एक बार ये आपके फोन में चला जाता है तो ये आपके व्हाट्स एप मैसेज हर वो चीज निकाल कर दूसरो को से सकता है जिसे आप सिर्फ अपने तक सीमित रखना चाहते है इसलिए आप अंदाजा लगा सकते है ये कितना खतरनाक है।

कैसे काम करता है पेगासस।

पेगासस “लोकप्रिय मोबाइल मैसेजिंग ऐप से पासवर्ड(Password), संपर्क सूची (COntact List), कैलेंडर ईवेंट, टेक्स्ट संदेश (Text Massage) और लाइव वॉयस कॉल (Live Voice Call) सहित यूजर्स के निजी डेटा को चुरा सकता है”। निगरानी के दायरे का विस्तार करते हुए, फोन के आसपास की सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए फोन कैमरा और माइक्रोफोन को चालू किया जा सकता है। और जीपीएस के जरिए ये आपके लोकेशन तक का पता लगा लेता है।
ये मैलवेयर पासवर्ड से सुरक्षित उपकरणों तक में पहुंचने की क्षमता रखता है। जहां इंस्टॉल किया गया उस डिवाइस पर कोई निशान नहीं छोड़ना, कम से कम बैटरी, मेमोरी और डेटा की खपत ताकि उपयोगकर्ता को संदेह पैदा न हो, जोखिम की स्थिति में स्वयं से अनइंस्टॉल होना, गहन विश्लेषण के लिए किसी भी डिलीट की गई फाइल को पुनः प्राप्त करने की क्षमता भी इस मैलवेयर में है।

किसने बनाया पेगासस।

इस पेगासस (Spyware) को एक इजराइली कंपनी ने बनाया है जिसका नाम है NSO (Niv Carmi Shalev Hulio Omri Lavie) ये सिर्फ NSO का फुलफॉर्म ही नहीं ये एनएसओ के बनाने वाले तीन लोगो का नाम है जिनके ऊपर कंपनी का नाम रखा गया है। लेकिन अब आप ये सोच रहे होगे की आखिर इस तरह के स्पाइवेयर को बनाया क्यों गया तो इसका भी जवाब है हमारे पास पेगासस कहता है की हमने इस स्पाइवेयर को इसलिए बनाया है की सरकारी इंटेलेंजेंस और लॉ एजेंसीज इसका इस्तेमाल कर सके और क्राइम और आतंकवाद के खिलाफ काम कर सके।

2016 में पहली बार सामने आया नाम।

पहली बार साल 2016 में संयुक्त अरब अमीरात के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर की बदौलत मिली। उन्हें कई एसएमएस प्राप्त हुए थे, जो उनके मुताबिक संदिग्ध थे। उनका मानना था कि उनमें लिंक गलत मकसद भेजे गए थे। उन्होंने अपने फोन को टोरंटो विश्वविद्यालय के ‘सिटीजन लैब’ के जानकारों को दिखाया। उन्होंने एक अन्य साइबर सुरक्षा फर्म ‘लुकआउट’ से मदद ली। मंसूर का अंदाज़ा सही था। अगर उन्होंने लिंक पर क्लिक किया होता, तो उनका आइफ़ोन मैलवेयर से संक्रमित हो जाता। इस मैलवेयर को पेगासस का नाम दिया गया। लुकआउट के शोधकर्ताओं ने इसे किसी “एंडपॉइंड पर किया गया सबसे जटिल हमला बताया। गौर करने वाली बात ये है कि आमतौर पर सुरक्षित माने जाने वाले एप्पल फ़ोन की सुरक्षा को ये प्रोग्राम भेदने में कामयाब हुआ। हालांकि एप्पल इससे निपटने के लिए अपडेट लेकर आया था।

भारत सरकार पर क्यों लग रहे आरोप।

विपक्ष का कहना है की भारत सरकार ने भी जासूसी करने के लिए पेगासस स्पाइवेयर को खरीदा। विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा की पत्रकारों पर और विपक्ष के लोगो पर जासूसी किया जा रहा लेकिन इस बात पर विपक्ष के पास भी कोई पुख्ता सबूत नही है की भारत सराकर के पेगासस को खरीदा।

मामले पर सरकार का क्या कहना है।

सरकार ने कहा है कि लोगों पर सरकारी निगरानी के आरोपों का कोई ठोस आधार या इससे जुड़ा कोई सच नहीं है। पहले भी, भारत सरकार द्वारा वॉट्सऐप पर पेगासस के उपयोग के संबंध में इसी तरह के आरोप लगाए गए थे। उन रिपोर्टों का भी कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था। तब इसका सभी पक्षों द्वारा स्पष्ट रूप से खंडन किया गया था, जिसमें भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में व्हाट्सएप के द्वारा किया गया खंडन भी शामिल था। इसी प्रकार, यह मीडिया रिपोर्ट भी भारतीय लोकतंत्र और इसकी संस्थाओं को बदनाम करने के लिए अनुमानों और अतिशयोक्ति पर आधारित प्रतीत होती है।

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