प्रियंका का अमेठी से चुनाव लड़ने को लेकर अमेठी की जनता का प्रियंका को क्या है राय? काँग्रेस क्या अमेठी में कर पाएगी वापसी?

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गांधी परिवार का गढ़ कहे जाने वाले अमेठी में क्या है आज के राजनीतिक हालात प्रियंका गांधी का अमेठी से चुनाव लड़ने पर क्या है मौजूदा समय मे अमेठी की जनता की राय??

अमेठी जहाँ कांग्रेस का एक लंबे समय से वर्चस्व रहा है, अमेठी लोकसभा 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी जो कि यहाँ से सांसद रह चुके हैं, एक लम्बे समय से गांधी परिवार अमेठी में अपना वर्चस्व बरकरार ही था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में काँग्रेस पार्टी को हार का मुह भी देखना पड़ा था बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा की प्रचंड जीत में कई ऐसे उलटफेर हुए थे जो की काफी चौंकाने वाले थे जिसमे से एक अमेठी में जीत भी थी भले ही राहुल गांधी 2019 में वायनाड सीट से जीत दर्ज कर ली थी, लेकिन गांधी परिवार का कांग्रेस गढ़ कहा जाने वाला अमेठी लोकसभा सीट से बड़ी हार का सामना करना पड़ा था जिन्हें की भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने करीब 55 हजार वोटों से हराया था, 2019 की मोदी लहर में अमेठी से राहुल गांधी को मिली इस करारी शिकस्त ने कांग्रेस के इतिहास के पन्नों में एक अनचाहा हिस्सा भी जोड़ दिया था।

अमेठी और कांग्रेस का नाता?

बता दें कि अमेठी से अभी तक गांधी परिवार से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सिर्फ संजय गांधी को सन् 1977 में हार का सामना करना पड़ा था और राहुल गांधी दूसरे ऐसे कांग्रेसी नेता बन गए थे जिन्हें अपने ही गढ़ में किसी ने हराया था और अब यूपी विधानसभा 2022 में कांग्रेस का अमेठी से क्या रणनीति रहेगी ये देखना होगा पर अमेठी की जनता का इस विषय पर क्या मानना है वो जानना बेहद जरूरी हो जाता है बता दें कि 2019 में अमेठी में स्मृति ईरानी अमेठी की लोकसभा सीट जीतकर कांग्रेस को एक बड़ा झटका दिया था और अब अमेठी में स्मृति ईरानी एक मजबूत दावेदार मानी जाती है और लोग उन्हें दीदीजी कहकर बुलाते है ।

पिछले दिनों जब ‘द राजधर्म’ की टीम अमेठी पहुची और वहाँ के लोगों से यह जाना कि अमेठी में क्या बदलाव देखने को मिले विकास की रफ्तार में तेज़ी आई या नही ऐसे तमाम मुद्दों पर हमारी टीम ने जब वहाँ के लोगों से बातचीत किया तो उन्होंने बताया की क्या है अभी अमेठी का हाल और पहले से अब में क्या आएं है राजनीति रण में बदलाव।

पिपरी ग्रामसभा जिसने कर दिया था 2014 के चुनाव का बहिष्कार, क्या है पूरी कहानी

2014 के लोकसभा चुनाव में पिपरी ग्रामसभा के ग्राम प्रधान और सभी लोगों ने यह फैसला किया था कि वो चुनाव का बहिष्कार करेंगे, पूरा का पूरा गाँव किसी को वोट न करने का संकल्प ले लिया था। बता दें कि 2014 के चुनाव में इस गांव के लोगों ने यह तय किया था कि हम किसी भी पार्टी को समर्थन नहीं देंगे फिर चाहे वह भाजपा हो, कांग्रेस या फिर समाजवादी पार्टी हो, गाँव का एक भी वोट किसी भी पार्टी के पास नहीं जाएगा, जिसके बाद स्मृति ईरानी इनके पास पहुची तो ग्रामसभा पिपरी के लोगों ने उनसे यही कहा कि हम इस बार चुनाव का बहिष्कार करेंगे हम इस बार वोट नहीं करेंगे और अपनी सभी समस्या स्मृति ईरानी के सामने रखा और उस बार के चुनाव में ग्रामसभा के लोगों ने वोट नही डाले थे और उस चुनाव में स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के सामने हार का सामना करना पड़ा था पर अपने दौरे के समय स्मृति ईरानी ने ग्रामसभा के सभी लोगों से यह वादा किया था, ईरानी ने कहा था कि आपकी जो भी समस्या है मैं चुनाव जीतूँ या ना जीतूँ मैं आपकी समस्या का समाधान जरूर करूंगी और आपके समस्या को मैं जरूर समझूंगी फिर उसके बाद 2016-17 में उनकी सबसे बड़ी समस्या जो कि बांध की थी वो बांध बनकर तैयार हो गया गया जो कि वहाँ के किसानों की सालों से दिक्कत थी जिसे की स्मृति ईरानी के इस वादे ने जो की उन्होंने यहाँ के लोगों से किया था उसे पूरा किया गया और 2019 लोकसभा के चुनाव में यहाँ से स्मृति ईरानी ने बम्पर वोटों से जीत दर्ज किया था।

प्रियंका गांधी को अमेठी से विधानसभा चुनाव लड़ने पर अमेठी के लोगों की यह है राय

जब ‘द राजधर्म’ की टीम ने प्रियंका गांधी के 2022 विधानसभा चुनाव अमेठी से लड़ने पर अमेठी के लोगों से बातचीत किया और कई सवाल पूछा तो वहाँ के लोगो ने कुछ इस प्रकार के जवाब दिए।

सवाल – अगर अमेठी में प्रियंका गाँधी विधायिका का चुनाव लड़ती हैं तो उस पर आपका कैसा समर्थन है?
जवाब- बिल्कुल नहीं, जिसको किसान के बारे में जानकारी ही नही है तो हम किसान ऐसे लोग को अमेठी से नेता क्यों बनाए।

सवाल- राहुल गांधी यहाँ से सांसद रह चुके है और उनके हार के बाद ऐसा नजर आ रहा है की शायद प्रियंका गांधी अमेठी से 2022 विधानसभा में चुनाव लड़ सकती है इस पर क्या राय है?
जवाब – प्रियंका गांधी ने तो कभी अमेठी के लोगों से बातचीत ही नही किया है , दीदीजी (स्मृति ईरानी) हमारे बीच आती रहती हैं, लोगों से मिलती है गरीबों के समस्याओं का समाधान करती है तो हम ऐसा ही नेता चाहते हैं जो हम लोगो से जुड़ा रहे ऐसा नही जिसे चुनाव के बाद अमेठी का पता तक न मालूम हो।

सवाल- स्मृति ईरानी का दीदीजी तक का सफ़र अमेठी द्वारा उन्हें यह नाम कैसे दिया गया?
जवाब – उनके प्रेमभाव से, जिस प्रेमभाव से यहाँ के लोगों को वो भैया बोलती हैं उसी प्रेमभाव से अमेठी की जनता उन्हें दीदीजी कह कर बोलती है।

सवाल – लोगों का मानना है प्रियंका गाँधी में इंदिरा गांधी की छवी नजर आती है वो कितना मायने रखती है इस चुनाव में?
जवाब- जो नेता गरीबों के हित मे काम करेगा हम उसी को वोट देंगे दीदीजी यहाँ आती है हमारी समस्याओं को सुनती है हम उन्ही को जानते है बाकी कांग्रेस के नेता यहाँ दिखते भी नहीं हैं और अब छवि नही काम मायने रखता है।

सवाल- कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले अमेठी में अब कांग्रेस पार्टी की छवि अमेठी के लोगों में कैसी है ? कांग्रेस पार्टी का अमेठी में पकड़ कमजोर होने का ऐसा क्या कारण है?
जवाब- राहुल गांधी के वजह से कांग्रेस का वर्चस्व अमेठी से ख़त्म है, यहाँ वो चुनाव जीतने के बाद कभी दिखायी ही नही देते थे, तो ऐसे लोगो को नेता क्यों चुनना, दीदीजी (स्मृति ईरानी) के आगे प्रियंका भी नही टिक पाएंगी।

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