जब सीएम योगी ने कहा ‘अब्बाजान’ तो भड़क गए अखिलेश यादव, BJP ने पलटवार करते हुए , कहा इसमें क्या दिक्कत है? मुलायम सिंह यादव भी तो अखिलेश को बुलाते हैं टीपू

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विधानसभा चुनाव से पहले अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘अब्बा जान’ शब्द ने चुनावी माहौल में मानो उफान सा ला दिया है। ‘अब्बा जान’ शब्द को लेकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी एक दूसरे के ऊपर तंज कसते नजर आ रहे है । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व् यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए एक कार्यक्रम में उनके पिता मुलायम सिंह यादव के लिए बड़े ही तीखे अंदाज में ‘अब्बा जान’ शब्द का प्रयोग बड़ा जोर देकर किया था
जिस पर अखिलेश यादव ने आपत्ति जताई थी अब उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने अखिलेश यादव पर तीखे सवाल खड़े कर दिए है उन्होंने कहा की मै अखिलेश यादव जी से ये पूछना चाहता हूं की उनको आख़िरकार इस शब्द से आपत्ति क्या है और अगर इस शब्द से इतनी आपत्ति है तो मुलायम सिंह यादव आपको टीपू क्यों बुलाते है ?

कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने अखिलेश यादव के ऊपर सीधा निशाना साधते हुए कहा की ‘उर्दू एक बहुत ही मीठी भाषा है और उर्दू के शब्द इतने मीठे शब्द कहे जाते है अब्बा एक बहुत ही मीठा शब्द है। उन्होंने कहा की अब अखिलेश मुलायम सिंह यादव को पिताजी तो कहते नहीं होंगे जब वह उनको डैडी बोल सकते है जो की अंग्रेजी शब्द है तो अब्बा शब्द क्यों नहीं बोल सकते ? अखिलेश यादव को यह बात सबको बतानी चाहिए की आखिर उर्दू के शब्दो से उनको इतनी नफरत क्यों है।

आखिरकार कहा से शुरु हुआ ये पूरा मामला ?

दरअसल ये पूरा मामला एक मीडिया चैनल के कार्यक्रम से शुरु हुआ जहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बातचीत के दौरान अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर अखिलेश यादव को तंज कसते हुए खरी खोटी सुनाया और कहा की ” इसी उत्तर प्रदेश में उनके अब्बाजान तो कहा करते थे की अयोध्या में कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
इस ‘अब्बा जान’ शब्द को लेकर अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा की उन्हें भाषा के गरिमा का ध्यान रखना चाहिए , हमारा झगड़ा मुद्दों को लेकर है व्यक्तिगत नहीं, इसमें वो मेरे पिता के बारे में न ही बोले। अगर वो मेरे पिता को बोल सकते है तो मै भी उनके पिता को बोल सकता हूं ,उन्हें सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए नहीं तो अपने भाषा की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।

आखिर योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव को ‘अब्बा जान’ क्यों कहा? क्या है इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह

इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह 1990 में मुलायम सिंह यादव द्वारा कारसेवकों पर चलाई गई गोली को माना जा रहा है।
30 अक्टूबर 1990 का वो दिन जिस दिन मुलायम सिंह यादव ने सेकुलरिज्म का चोला पहन कर कारसेवको पर गोलिया चलवाई थी जिससे उन्होंने के खुद को सेकुलरिज्म का नया मसीहा बना लिया था जिसके बाद लोग उन्हें मुल्ला मुलायम के नाम से ही बुलाने लगे थे। बता दे उस समय जब अयोध्या में कारसेवक और साधुओ की टोली श्री राम जन्मभूमि की ओर बढ़ रहे थे तब मुलायम सिंह यादव ने लाठीचार्ज और आँशु गैस के गोले भी चलवाए थे इसके बावजूद भी साधु संतो ने सुरक्षा बलो के पैरो को छूते हुए आगे बढ़ते रहे ,उन्हें न तो लाठीचार्ज और न ही आशु गैस के गोले रोक पाए थे।

मुलायम सिंह यादव ने उस वक्त ये बयान दिया था की अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता 30 अक्टूबर के दिन कोठारी भाइयो ने भगवा झंडे को गुम्बद पर चढ़ कर पूरे शान से लहराते हुए मुलायम सिंह को सीधी चुनौती दी थी उस वक्त तक वहा पर करीब 1 लाख लोग पहुंच चुके थे जिसमे से लगभग 20 हजार साधु संत थे। जब सरयू नदी पर कारसेवक जमा हुए थे तभी मुलायम सिंह ने पुलिस से गोलिया चलवाई थी। मंदिर परिसर में कारसेवको पर और नीव की खुदाई करने वालो पर ताबड़तोड़ गोलिया चलवाई गई थी जिसमे कई कारसेवको ने अपनी जान गवाई थी। उस समय देश के गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद थे और कारसेवकों पर गोली चलाए जाने से वो खुश भी थे और उन्होंने इसके लिए मुलायम सरकार को शाबाशी भी दिया था। इस घटना पर उस समय केंद्र सरकार द्वारा 15 कारसेवकों के मारे जाने का आँकड़ा दिया गया था, जबकि विश्व हिन्दू परिषद द्वारा 59 लोगों के मारे जाने का आँकड़ा दिया गया था। जिसके कारण ही मुलायम सिंह के प्रति लोगों के दिल में गुस्सा भरा हुआ था और 1991 में उनकी सरकार को जनता ने उखाड़ फेंकने का काम किआ और फिर जनता ने भाजपा द्वारा कल्याण सिंह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में नै सरकार बनाई । इसी घटना के बाद से ही लोग मुलायम सिंह यादव को मुल्ला मुलायम के नाम से बुलाने लगे थे और इसी घटना का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने पिता शब्द का इस्तेमाल न कर अब्बाजान शब्द का इस्तेमाल किया जिसके बाद से उत्तर प्रदेश का चुनावी माहौल फिर से गरमा गया है ।

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