योगी बनाम अखिलेश सरकार, किसके रहे 4 साल बेहतर, किस सरकार में अपराध हुआ कम।

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उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जब सत्ता में आई तो उनका पहला उद्देश महिलाओं की सुरक्षा और प्रदेश में पल रहे गुंडे और माफियाओं का खात्मा करना। और उन सफेदपोश हो चुके माफियाओं और गैंगस्टर का भी जो पूर्व की सरकार के संरक्षण में पल बढ़ रहे थे।
शुरुवात में महिलाओं के सुरक्षा के लिए योगी सरकार ने एंटी रोमियो दल का अभियान चलाया जोकि सार्वजनिक स्थलो, चौराहों, मार्केट, मॉल, स्कूल और बस स्टेशनो पर तैनात किए गए और उन मनचलों को निशाने पर लिया गया जो राह चलते महिलाओं और लड़कियों के साथ अभद्रता करते थे और चिन्हित किए गए व्यक्तियों पर वैधानिक करवाई भी की गई।

और फिर भ्रष्ट हो चुके पुलिसकर्मियों और अफसरों पर भी नकेल कसी गई दोषी पाए जाने पर निलंबन और तबादला भी हुआ। 2017 में जब योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ली तभी उन्होंने बता दिया कि उत्तर प्रदेश में गुंडों, मवालियो, और माफियाओं के लिए कोई जगह नही है उनके के लिए सिर्फ एक ही जगह है, और वो है जेल उन्होंने कहा अगर कोई भी अपराधी पुलिस पर गोली चलाता है तो पुलिस भी उसका जवाब गोली से देगी और इसी क्रम में कुख्यात अपराधियों का एनकाउंटर शुरू हुआ।
अगर आंकड़ों पर नजर डाले तो 2017 से लेकर 2021 तक इन चार सालों में कुल 135 अपराधी मारे गए जिसके 111 इनामी बदमाश थे और 24 गैर इनामी बदमाश। 5 लाख से लेकर 5 हजार तक के इनामी बदमाशो को मार गिराया गया।

कुख्यात बदमाश विकास दुबे का हुआ इनकाउंटर।

आज से ठीक 2 साल पहले कानपुर के बिकरू गांव में गैंगस्टर 5 लाख इनामी विकास दुबे और उसके गुर्गों ने डीएसपी आई एसओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। लेकिन मात्र एक हफ्ते के भीतर पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर विकास दुबे समेत छह बदमाशो को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। कई बड़ी राजनैतिक दलों का विकास दुबे के ऊपर हाथ था। गांव वालो की माने तो बहुजन समाज पार्टी से उसके अच्छे संबंध थे और समाजवादी पार्टी से वो विधानसभा का चुनाव भी लड़ने वाला था।

उत्तर प्रदेश के बाहुबलियों को भी निशाने पर लिया गया।

सपा सरकार के संरक्षण में अवैध रूप से बनाई गई संपतियो पर योगी सरकार ने बुलडोजर चलवा दिया फूलपुर के पूर्व सांसद अतीक अहमद पर योगी सरकार ने एक्शन लिया चकिया स्तिथ आवास जिसको पीडीए ने जमीजोद कर दिया और लगभग अब तक अतीक अहमद की अवैध रूप से बनाई और लोगो की हड़पी गई जमीन को जप्त कर लिया गया है अब तक अतीक से जुड़ी 300 करोड़ की संपति को योगी सरकार के द्वारा कब्जे में लिया जा चुका है।
वही भदोही के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा के ऊपर भी करवाई करते हुए प्रयागराज स्तिथ आलीशान घर पर भी योगी सरकार का बुलडोजर चला जोकि पीडीए के से बिना नक्शा पास कराए अवैध निर्माण कराया गया था। इसी तर्ज में प्रयागराज के ही चिन्हित किए गए और माफियाओं को भी छोड़ा नहीं गया। प्रयागराज के चाका से समाजवादी पार्टी के ब्लॉक प्रमुख दिलीप मिश्रा का अवैध रूप से 12 संपतियों को जप्त कर गैरकानूनी तरीके से बनाई गई बिल्डिंग को ध्वस्त कर दिया गया। और ये सभी माफिया आज उत्तर प्रदेश के जेलो में बंद है।

NRCB के आंकड़ों को देखें तो 2013 से लेके 2016 तक लूट, हत्या, बलात्कार, डैकती के मामले अभी के अनुसार बहुत अधिक है 2017 से 2020 में ये आंकड़े बहुत हद तक कम हुए है आइए डालते है आंकड़ों पर एक नजर।

आंकड़े अखिलेश सरकार के।

साल 2013 में हुए अपराध

हत्या-      5047
अपहरण- 11183
बलात्कार- 3050
बलवा- 6089
लूट- 3591
डकैती- 596
गंभीर वारदातें- 38779

साल 2014 में हुए अपराध

हत्या-      5150
अपहरण- 12361
बलात्कार- 3467
बलवा- 6438
लूट- 3920
डकैती- 294
गंभीर वारदातें- 41889

साल 2015 में हुए अपराध

हत्या-      4732
अपहरण- 11999
बलात्कार- 3025
बलात्कार का प्रयास- 422
बलवा- 6813
लूट- 3637
डकैती- 277
गंभीर वारदातें- 40,613

साल 2016 में हुए अपराध

हत्या-      4889
अपहरण- 15898
बलात्कार- 4816
बलात्कार का प्रयास- 1958
बलवा- 8018
लूट- 4502
डकैती- 284
गंभीर वारदातें- 65090

आंकड़े योगी सरकार के।

साल 2017 में हुए अपराध

हत्या –   4324
अपहरण- 19921
बलात्कार- 4246
बलात्कार का प्रयास- 601
बलवा- 8990
लूट- 4089
डकैती- 263
गंभीर वारदातें- 64,450

साल 2018 में हुए अपराध

हत्या-      4018
अपहरण-  21711
बलात्कार- 3946
बलात्कार का प्रयास- 661
बलवा- 8908
लूट- 3218
डकैती- 144
गंभीर वारदातें- 65,155

साल 2019 में हुए अपराध

हत्या-      3806
अपहरण- 16590
बलात्कार- 3065
बलात्कार का प्रयास- 358
बलवा- 5714
लूट- 2241
डकैती- 124
गंभीर वारदातें- 55,519

साल 2020 में हुए अपराध

हत्या-      3468
बलात्कार- 2317
बलवा- 5376
लूट- 1384
डकैती- 85
कुल दर्ज एफआईआर- 3,52,651

इस आंकड़े के हिसाब से बात करे तो अखिलेश सरकार और योगी सरकार की तो हत्या, बलात्कार, और लूट के मामले में तेजी से कमी आई है और 2020 तक देखे तो ये आंकड़े बहुत हद तक कम नजर आ रहे है।

अखिलेश सरकार में हुए दंगे।

1- मुज्जफरनगर दंगा

अखिलेश सरकार की सबसे बड़ी नाकामी मुज्जफरनगर दंगा इस दंगे में कुल 62 लोगो की मौत हुई थी। जब हजारों लोग विस्थापित होकर टेंट में रह रहे थे उस वक्त अखिलेश यादव सैफई महोत्सव में सलमान खान का डांस देख रहे थे। और ये दंगे सिर्फ धार्मिक ही नही थे। जाति के नाम पर, जमीन के नाम पर, छात्रों के दंगे सब शामिल हैं।

2- रामवृक्ष कांड

280 एकड़ सरकारी जमीन का मामला जिस पर सपा के ही एक आदमी रामवृक्ष यादव ने कब्जा बना रखा था। अधिक्रमण हटाने गई एसपी और एसएचओ मारे गए और 23 पुलिसकर्मी घायल हुए।

3- शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जलाया गया

शाहजहांपुर में पत्रकार संजय सिंह को जिंदा जलाया गया। जिसमे मरते हुए पत्रकार ने सपा के ही एक मंत्री का नाम लिया था, पत्रकार ने अपने बयान में कहा था की मंत्री राममूर्ति वर्मा के कहने पर पुलिस वालो ने पत्रकार को जिंदा जला दिया था।

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