तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की नजरें अब 2024 में होने लोकसभा चुनाव पर है । तेलंगाना राष्ट्र समिति प्रमुख (टीआरएस) के प्रमुख चंद्रशेखर 5 अक्टूबर को दशहरा के मौके पर अपनी राष्ट्रीय पार्टी के नाम का एलान कर सकते है ।

सूत्रों के मुताबिक, माना जा रहा है कि केसीआर दशहरा के मौके पर अपनी राष्ट्रीय पार्टी के नाम की घोषणा करेंगे । इससे पहले 5 अक्टूबर को ही तेलंगाना भवन में एक बैठक होनी है । सीएम ऑफिस से जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में इसकी जानकारी दी गई है ।

कहा जा रहा है कि इसी बैठक के बाद केसीआर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एंट्री के बारे में जानकारी दे सकते है । ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि टीआरएस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के लिए रवाना होगा । सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के नाम के एलान के बाद केसीआर 9 अक्टूबर को दिल्ली में जनसभा करेंगे ।

इस बारे में टीआरएस नेता श्रीधर रेड्डी ने कहा, ” एनडीए शासन चलाने में असफल हुआ है । ऐसे में देश की जनता मजबूत राष्ट्रीय दल की ओर देख रही है । ” रेड्डी ने आगे कहा, गुजरात मॉडल बुरी तरह फेल हो गया है । देश के लोग मजबूत विकल्प की ओर देख रहे है । उन्होंने कहा, ” इंतजार करिए और देखिये… सीएम केसीआर राष्ट्रीय पार्टी के नाम की घोषणा करेंगे । ”

चंद्रशेखर राव

केसीआर के इस संभावित कदम को लेकर कांग्रेस ने हमला बोला है । तेलंगाना कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष और पूर्व सांसद मधु गौड़ ने कहा, ‘केसीआर का राष्ट्रीय पार्टी के गठन का फैसला बेतुका है । उन्होंने तेलंगाना के लोगों को बेवकूफ बनाया और अब देश की जनता को बनाना चाहते है । यह उनकी नाकामियों को छुपाने और परिवार के सदस्यों को दिल्ली शराब घोटाले से बचाने की एक चाल है ।

उन्होंने आगे कहा, ” भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए केसीआर विपक्ष को सिर्फ बांटने की कोशिश कर रहे है । कांग्रेस ही भाजपा मुक्त देश का विकल्प है । अगर केसीआर भी ऐसा ही चाहते हैं, तो उन्हें कांग्रेस में आना चाहिए ।”

इसको लेकर भाजपा के राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मण मे भी प्रतिक्रिया दी है । उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में भी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पार्टी लॉन्च करने का अधिकार है । उन्होंने कहा, ” केसीआर ने तेलंगाना की जनता से किए वादों को अभी तक पूरा नहीं किया है । ऐसे में राज्य की जनता में उनकी सरकार को लेकर भारी नाराजगी है । ”

चंद्रशेखर राव (केसीआर) तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री है । तेलंगाना राज्य आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद वह सत्ता में आएक्ष। वह क्षेत्रीय राजनीतिक दल तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता और अध्यक्ष है । वह सिद्दीपेट जिले के गजवेल निर्वाचन क्षेत्र के विधायक है । इससे पहले, उन्होंने सिद्दीपेट से आंध्र प्रदेश के विधायक और महबूबनगर, करीमनगर और मेदक के सांसद के रूप में काम किया । उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से साहित्य में एमए के पूरा होने के बाद, उन्होंने युवा कांग्रेस के साथ राजनीति में प्रवेश किया ।

उस अवधि के दौरान कांग्रेस खराब स्थिति में थी लेकिन वह संजय गांधी के साथ खड़ा था और उपस्थिति बरकरार रखी थी । 1983 में वह टीडीपी में शामिल हो गए और फिर 2001 में, उन्होंने टीडीपी से इस्तीफा दे दिया और अलग राज्य की मांग के साथ लोगों के लिए खड़े हो गए । उनका मानना था कि एक अलग राज्य ही एकमात्र समाधान है । साल 2001 में, उन्होंने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) पार्टी का गठन किया । अगस्त 2006 में, उन्होंने तेलंगाना के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और नई दिल्ली में जंतर मंतर में भूख हड़ताल पर बैठे । 29 नवंबर 2009 को वो फिर से भूख हड़ताल पर गये । फिर सरकार द्वारा भारत के एक अलग राज्य तेलंगाना के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी की घोषणा के बाद उन्होंने के 9 दिसंबर 2009 को भूख हड़ताल खत्म कर दी ।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का राजनैतिक परिचय

  • 6 सितंबर 2018 को, उन्होंने राज्य में टीआरएस सरकार को भंग कर दिया और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया । जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया ।
  •  आंध्र प्रदेश से तेलंगाना को अलग करने के बाद, उन्होंने गजवेल और मेदक से विधानसभा चुनाव में सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा । इसके अलावा वह 16वीं लोकसभा चुनावों में भी लोकसभा के लिए चुने गए थे । लेकिन उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया और तेलंगाना के मुख्यमंत्री बने ।
  •  वह देवारकोंडा विट्टल राव (आईएनसी) को हराकर महबूबनगर से लोकसभा के लिए चुने गए थे । साथ ही वह तेलंगाना राष्ट्र समिति संसदीय दल, लोकसभा के नेता बने। और फिर ऊर्जा और सदस्य, नियम समिति पर गठित स्थायी समिति के सदस्य बने ।
  •  उन्होंने 3 मार्च 2008 को लोकसभा से इस्तीफा दे दिया । 2008 के उपचुनाव में दोबारा सांसद के रूप में चुने गए ।
  • उन्होंने 23 सितंबर 2006 को लोकसभा से इस्तीफा दे दिया । फिर उसी निर्वाचन क्षेत्र से 7 दिसंबर 2006 को उप-चुनाव में 14वीं लोक सभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए ।
  • बता दें कि उनको 2014 में सीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ द ईयर लोकप्रिय चॉइस अवॉर्ड और 2017 में कृषि नेतृत्व पुरस्‍कार से नवाज़ा गया ।

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