राजस्थान

कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।  जहां एक तरफ परिवारवाद का दाग मिटाने के लिए पार्टी अध्यक्ष पद पर गैर गांधी परिवार से किसी को बैठाना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए लड़ाई छिड़ गई है । कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी सचिन पायलट को देना देना चाहती है । लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसके सख्त खिलाफ है ।अब सोनिया गांधी भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। फैसला लेना आसान नहीं है ।

 

गहलोत vs पायलट में फंस गई सोनिया गांधी

 

दरअसल कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होने वाला है । कुछ ही दिनों में अशोक गहलोत नामांकन भी कर देंगे उनके खिलाफ शशि थरूर भी मैदान में हो सकते हैं । अशोक गहलोत पार्टी के नए अध्यक्ष होंगे लगभग लगभग यह बात साफ हो चुकी है । कांग्रेस आलाकमान अशोक गहलोत को अध्यक्ष पद तो वही एक व्यक्ति एक पद नियम के तहत राजस्थान में नए मुख्यमंत्री के तौर पर सचिन पायलट को बनाना चाहती थी । लेकिन अब खेल बिगड़ चुका है गहलोत खेमे के 70 विधायकों ने विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी के घर पहुंचकर इस्तीफा दे दिया है । मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि हमारी एक ही मांग है बगावत करने वाले को मुख्यमंत्री ना बनाया जाए । दरअसल, साल 2020 में सचिन पायलट ने कांग्रेस से बगावत कर ली थी । कई दिनों तक ये सियासी ड्रामा जारी रहा था । इस दौरान अटकलें लगाई गईं थी कि राहुल और प्रियंका गांधी ने उनकी कई शर्तें मानते हुए पार्टी में वापसी कराई थी। हालांकि बगावत के दौरान अशोक गहलोत ने उन्हें काफी बुरा भला कहा था यहां तक कि सचिन पायलट से डिप्टी सीएम समेत सभी पद छीन लिए गए थे । अशोक गहलोत आज भी पायलट को मुख्यमंत्री नहीं देखना चाहते हैं । यही सोनिया-राहुल-प्रियंका गांधी की सबसे बड़ी मुसीबत है ।

 

गहलोत गुट ने शर्तों के साथ रखा सुलह का प्रस्ताव

गहलोत खेमे के विधायकों का कहना है कि राजस्थान में नए मुख्यमंत्री की जिम्मेवारी उन्हीं 102 विधायकों मे से किसी एक को दी जाए जिन्होंने 2020 में पायलट के बगावत के बाद सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। कुल मिलाकर गहलोत खेमे के विधायकों का साफ संदेश है यह है कि पायलट को मुख्यमंत्री ना बनाया जाए । साथ ही उनकी दूसरी शर्त यह भी है कि मुख्यमंत्री का घोषणा 19 अक्टूबर अध्यक्ष पद का चुनाव संपन्न होने के बाद की जाए । तीसरी शर्त यह है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री गहलोत के ही पसंद का हो ।

 

मुख्यमंत्री-अध्यक्ष दोनों पद चाहते थे गहलोत

 

दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अशोक गहलोत का नाम सुर्खियों में आने के बाद गहलोत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि मैं अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहा हूं मेरे खिलाफ कोई भी चुनाव लड़ सकता है मुझे नामित नहीं किया जा रहा है । इसलिए यहां पर एक व्यक्ति एक कानून लागू नहीं होता है । इसके कुछ ही दिनों बाद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि एक व्यक्ति एक पद कानून जो उदयपुर चिंतन शिविर में लागू किया गया था वह आज भी लागू है । जिसके बाद से अशोक गहलोत के बोल बदलने लगे थे । अब अशोक गहलोत राजस्थान में सीएम पद की कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार है लेकिन किसी कीमत पर वह पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहते । मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अशोक गहलोत ने सीपी जोशी का नाम मुख्यमंत्री के लिए आलाकमान को सुझाया है ।

 

राहुल गांधी पूरा कर पाएंगे पायलट का वादा ?

दरअसल साल 2020 में जब सचिन पायलट कांग्रेस पार्टी से बगावत किए थे, तब माना जाता है कि राहुल गांधी ने उन्हें समझाकर पार्टी में वापस बुलाया था । उस समय अटकलें चल रही थी कि राहुल गांधी सचिन पायलट को भरोसा दिए हैं कि आने वाले समय में उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा । प्रियंका गांधी का इसमें अहम रोल था मीडिया हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि सचिन पायलट प्रियंका गांधी के भी काफी करीब है सचिन पायलट को कांग्रेस पार्टी में वापस बुलाने में प्रियंका गांधी का भी अहम रोल था । शायद इसीलिए सोनिया गांधी भी चाहती हैं कि अब राजस्थान की कुर्सी सचिन पायलट को दे दी जाए । लेकिन गहलोत के जीद के सामने सोनिया गांधी क्या करेंगी यह देखने वाली बात होगी ।

मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस गहलोत और पायलट

2018 राजस्थान चुनाव में पायलट का अहम रोल

कांग्रेस पार्टी में सचिन पायलट का कद ऊंचा है । सचिन पायलट 2018 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए एड़ी से चोटी तक का दम लगा दिए थे नतीजन उन्हें सफलता भी हासिल हुई । उस वक्त पायलट मुख्यमंत्री की कुर्सी से थोड़ा पीछे रह गए थे सचिन पायलट को डिप्टी सीएम का पद मिला था, लेकिन बगावत के बाद वह पद भी उनसे छीन लिया गया । 2013 में गहलोत के नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव लड़ा था लेकिन कुछ खास प्रदर्शन नहीं था 2018 में पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया था ।

 

राजस्थान का सियासी समीकरण समझ लीजिए

राजस्थान में कुल विधानसभा की 200 सीटें हैं । बहुमत का जादुई आंकड़ा है 101 यानी राजस्थान में सरकार बनाने के लिए 101 विधायकों की जरूरत है। मतलब साफ है कि सचिन पायलट अगर मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, तो उन्हें 101 विधायकों का समर्थन चाहिए जो कि फिलहाल उनके पास नहीं दिख रहा है । अशोक गहलोत के पास यह जादुई आंकड़ा है जिसके कारण वह मजबूत दिखाई दे रहे हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी मात्र 21 सीटें ही जीत पाई थी लेकिन 2018 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी की सीटों में बंपर बढ़ोतरी हुई और यह 21 से बढ़कर यह 100 पर पहुंच गई। 2018 के विधानसभा चुनाव में 13 निर्दलीय प्रत्याशी भी जीते हैं निर्दलीय प्रत्याशी अगर पायलट के साथ दे भी देते हैं तो भी सरकार बनाना मुश्किल है । अब अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान के ऊपर है अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी सचिन पायलट की नाराजगी कैसे दूर करते हैं ।

बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 22 सितंबर को अधिसूचना जारी हो गई । नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 24 से 30 सितंबर तक चलेगी । नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर है । एक से ज्यादा उम्मीदवार होने पर चुनाव 17 अक्टूबर को होगा और नतीजे 19 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे ।

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