भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह आज अपना 90वां जन्मदिन मना रहे है । उन्होंने 1982-1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर के रूप में कार्य किया और पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री थे । वह साल 1991 में भारत के आर्थिक उदारीकरण के लिए जिम्मेदार लोगों में से एक थे । डॉ सिंह ने आर्थिक सुधारों की शुरुआत की जो भारत को उदारीकरण की ओर ले गए और ” लाइसेंस राज ” को समाप्त कर दिया ।

पीएम मोदी ने मनमोहन सिंह को दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह को उनके 90 वें जन्मदिन पर बधाई दी ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को उनके 90वें जन्मदिन पर बधाई भेजी है और उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की । पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह जी को जन्मदिन की बधाई। उनके लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना ।

राहुल गांधी ने भी दी बधाई मनमोहन सिंह को बधाई

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी डॉक्टर मनमोहन सिंह को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने लिखा कि भारत के बेहतरीन राजनेताओं में से एक, डॉ मनमोहन सिंह जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। भारत के विकास में उनकी विनम्रता, समर्पण और योगदान में कुछ समानताएं हैं। वह मेरे लिए और करोड़ों अन्य भारतीयों के लिए एक प्रेरणा हैं। मैं उनके अच्छे के लिए प्रार्थना करता हूं।

मनमोहन सिंह जन्मदिन

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर, पूर्व प्रधान मंत्री के बारे में कुछ कम ज्ञात तथ्यों पर एक नज़र डालते है –

 

  • मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर,1932 हुआ था । उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड में अध्ययन किया । लगातार दो बार (2004-2014 तक) प्रधानमंत्री रहे डॉ सिंह आज 90 साल के हो गए हैं । वह एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं, जिन्हें 1990 के दशक में व्यापक सुधारों को शुरू करने का श्रेय दिया जाता है ।

मनमोहन सिंह जीवनी

  • अपनी सादगी और अंतर्मुखी स्वभाव के लिए जाने जाने वाले मनमोहन सिंह बेहद चतुर और बुद्धिमान व्यक्तित्व वाले प्रधानमंत्री रहे है । शिक्षा के प्रति रुझान ने उन्हें प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा दिया किन्तु वह खुद को एक आम इंसान ही मानते रहे है । उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें साल 1987 में पद्मविभूषण सम्मान प्रदान किया गया । भारत को उन्नति के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में कई मजबूत कदम उठाए जिनका देश की जनता को तो लाभ हुआ ही साथ ही विश्व पटल पर भी भारत एक मजबूत राष्ट्र बनकर उभरा है ।
  •  डॉ. सिंह एक ईमानदार और कर्त्तव्यनिष्ठ व्यक्ति है । उनको यूपीए ( संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ) सरकार का समर्थन प्राप्त है तथा पूरा देश उन पर विश्वास करता है । उनकी छवि एक सुशील और ईमानदार व्यक्ति के रूप में विख्यात है और अपनी ईमानदार छवि के कारण उनको कुछ लोग डॉ. ऑनेस्ट भी कहते हैं । उनका रिकॉर्ड बेदाग रहा है । वह सादगी की मूर्ति हैं और मूल्यों में विश्वास करते हैं । उनके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए देश ने उनके प्रधानमंत्री बनने का स्वागत किया और जिस प्रकार से प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने किसानों और श्रमिक वर्ग के लिए दो घोषणाएँ की हैं उससे यह साबित हो चुका है कि यह व्यक्ति समाज के निम्न वर्ग का हितैषी है ।
  • मनमोहन सिंह हिंदी नहीं पढ़ सकते थे । हालाँकि वह हिंदी बोल सकता है, लेकिन वह भाषा की लिपि नहीं पढ़ सकते थे । यहां तक ​​कि जब वे देश का नेतृत्व कर रहे थे, तब भी उनके भाषण उर्दू में लिखे गए थे, क्योंकि वे इसमें पारंगत थे ।
  • साल 1971 में भारत सरकार द्बारा मनमोहन सिंह जी को आर्थिक सलाहकर वाणिज्य मंत्रालय के लिए नियुक्त किये गए, इसको देखते हुए 1972 में उन्हें मुख्य सलाहकार, वित्त मंत्रालय में नियुक्त किया । इनकी नियुक्ति बहुत से पदों के लिए हुई जैसे की वित्तमंत्री, उपसभापति, योजन मंत्री, रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में, प्रधानमंत्री के सलहाकार के रूप मे । साल 1991 से 1996 के बिच पाच वित्त मंत्रीयो ने मिलकर आर्थिक मंदी हटाकर भारत को पुन्ह स्थापीत किया । उन्होंने  भारत के लिये आर्थिक योजना बनाई जो पुरे विश्व में मान्य है । उन्होंने अपने कार्यालय के दौरान अपने सहयोग से विकट परिस्थितियों से भारत को निकला था ।
  •  पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के घर में उनके जीवन के पहले 12 वर्षों तक बिजली नहीं थी । डॉ मनमोहन सिंह गाँव गाह (अखंड भारत में) में रहते थे, जहाँ बिजली नहीं थी । उनके परिवार के पास पाइप से पानी और स्कूल तक पहुंच नहीं थी, और वह स्कूल जाने के लिए मीलों पैदल चलकर जाते थे और वे मिट्टी के तेल के दीपक की रोशनी में पढ़ते थे ।
  • पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के बाद, डॉ सिंह और उनका परिवार अमृतसर चले गए, जहां उन्होंने खरोंच से जीवन शुरू किया। उस समय वह 14 वर्ष के थे ।
  •  पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष का वित्त मंत्री नामित किया गया था । साल 1993 में यूरोमनी और एशियामनी द्वारा डॉ सिंह को वर्ष का वित्त मंत्री नामित किया गया था ।
  • साल 1991 में मनमोहन सिंह जी ने सरकारी नौकरी छोड़ राजनीती में कदम रखा । इस समय पी वी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री चुने गए थे, उन्होंने अपने कैबिनेट मंत्रालय में मनमोहन सिंह जी को वित्त मंत्री बना दिया । इस समय भारत बहुत बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा था, मनमोहन सिंह जी ने देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए कई देशों के दौरे किए । उन्होंने सबसे पहले सत्ता में आते ही ” लायसेंस राज ” नाम की योजना को बंद किया, इसके अंतर्गत किसी भी बिजनेस में अगर कोई बदलाव होता है, तो उसके लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी‌ । इस योजना से कई प्राइवेट फ़र्म को फायदा मिला, उन्हें स्वतंत्र बनाने से देश को आर्थिक फायदा मिलने लगा ।
  •  पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह भारत के प्रधान मंत्री बनने वाले पहले गैर-हिंदू थे । डॉ मनमोहन सिंह भारत के प्रधान मंत्री बनने वाले पहले सिख और पहले गैर-हिंदू थे ।
  •  पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह भारत के पहले प्रधान मंत्री के एक प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया । जब पं. जवाहर लाल नेहरू ने 1962 में मनमोहन सिंह को सरकार में शामिल होने की पेशकश की, उन्होंने मना कर दिया क्योंकि वे अमृतसर में अपने कॉलेज में पढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता का अपमान नहीं करना चाहते थे ।
  • पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह भारत में सेवा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र छोड़ दिया । डॉ मनमोहन सिंह ने साल 1966-1969 तक अर्थशास्त्री राउल प्रीबिश के तहत व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के साथ काम किया, लेकिन जब उन्हें दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में व्याख्याता के रूप में काम करने का प्रस्ताव मिला, तो उन्होंने संयुक्त राष्ट्र छोड़ दिया और भारत वापस आ गए । यह एक ऐसा समय था जब हर प्रतिभाशाली अर्थशास्त्री संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने का सपना देखता था ।

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