PFI ( पॉपुलर फ्रंट इंडिया ) के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद बड़ा खुलासा हुआ है । अब खबर है कि प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि संगठन ने बिहार के पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को निशाना बनाने की योजना तैयार की थी । इसके साथ ही जांच एजेंसी ने बताया कि PFI टेरर मॉड्यूल तैयार करने और अन्य हमलों की भी तैयारी कर रहा था ।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, केरल से गिरफ्तार हुए PFI सदस्य शफीक पायेथ के रिमांड नोट में ईडी ने सनसनीखेज दावे किए हैं। एजेंसी का कहना है कि पीएफआई ने इस साल 12 जुलाई को पीएम मोदी के पटना दौरे पर हमला करने के लिए ट्रैनिंग कैंप लगाया था । खास बात है कि साल 2013 में इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े आतंकियों ने भी उनकी रैली में धमाका किया था ।

प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने पटना में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को लक्षित करने की योजना बनाई थी । और यूपी में संवेदनशील स्थानों और व्यक्तियों पर हमले शुरू करने के लिए आतंकवादी मॉड्यूल, घातक हथियारों और विस्फोटकों के संग्रह में शामिल था ।

ईडी ने गुरुवार को केरल से गिरफ्तार पीएफआई सदस्य शफीक पायथ के खिलाफ अपने रिमांड नोट में सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि इस साल 12 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पटना यात्रा के दौरान संगठन ने हमला करने के लिए एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया था ।

PFI

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने अक्टूबर 2013 में पटना में एक करीबी मुंडा था, जब इंडियन मुजाहिदीन से संबंधित जेहादी आतंकवादियों, जो कि पीएफआई की तरह, भारत में गैरकानूनी स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट के सदस्य हैं, ने एक रैली पर बमबारी की, जिसे उन्होंने तुरंत बाद में संबोधित किया ।

गुरुवार को हुई थी PFI के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

गुरुवार को देश के करीब 13 राज्यों में ईडी और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के साथ मिलकर रेड की थी। उस दौरान NIA ने 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। जबकि, ईडी ने चार लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें परवेज अहमद, मोहम्मद इलियास और अब्दुल मुकीत का नाम शामिल है। ईडी इससे पहले भी इन सभी से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान पूछताछ कर चुकी है।

इधर, जांच एजेंसी ने पायेथ पर भी शिकंजा कसा है । आरोप है कि उसने भारत में NRI खाते का इस्तेमाल कर PFI के लिए विदेश से धन ट्रांसफर किया । रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने बताया है कि बीते साल पायेथ के ठिकानों पर रेड की थी । एजेंसी ने कहा, ” पीएफआई और उससे जुड़ी संस्थाओं के खातों में 120 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए गए थे। इसका एक बड़ा हिस्सा देश और विदेश से संदिग्ध स्त्रोत से कैश में जमा किया गया था । ”

PFI को लेकर एजेंसी ने किया है ये दावा

एजेंसी ने आगे दावा किया कि ” इन फंडों को समय के साथ उनकी निरंतर गैरकानूनी गतिविधियों में अंतिम उपयोग के लिए स्तरित और स्थानांतरित किया गया था, जिसमें फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के लिए हिंसा भड़काने और परेशानी पैदा करने तक सीमित नहीं है ।

PFI ( पीएफआई ) के सदस्यों की हाथरस की यात्रा शामिल है । सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, दंगे भड़काने और आतंक फैलाने के इरादे से, एक आतंकवादी गिरोह बनाने की योजना बनाई, घातक हथियारों और विस्फोटकों का संग्रह एक साथ यूपी में महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों और व्यक्तियों पर हमले शुरू करने के इरादे से एकता, अखंडता और संप्रभुता को कमजोर करने के इरादे से देश ।”

एजेंसी ने पीएफआई पर आपराधिक साजिश और गतिविधियों का आरोप लगाया है जिसमें “राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने” की क्षमता थी। जांच के दौरान पीएफआई और उसके सदस्यों के विभिन्न बैंक खातों का विश्लेषण किया गया और आरोपियों के बयान दर्ज किए गए।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया PFI (पीएफआई) को लेकर एक और सनसनीखेज खुलासा किया है । अधिकारियों ने दावा किया है कि ने इस साल जुलाई में बिहार की राजधानी पटना में पीएफआई(PFI)ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले करने की खतरनाक योजना बनाई थी । इसके लिए संगठन ने पटना में ट्रैनिंग कैंप भी लगाया था और कई सदस्यों को ट्रेनिंग देने का काम किया । इतना ही नहीं वित्तपोषण के लिए कई विदेशी ताकतों के संपर्क में थे । पीएम मोदी के हर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी । मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक केवल पीएम मोदी पर ही हमले नहीं बल्कि PFI अन्य हमलों के लिए भी टेरर मॉड्यूल तैयार कर रहा था ।

एजेंसी ने गुरुवार को संगठन पर देशव्यापी छापेमारी के बाद चार पीएफआई सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसके दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी सहित कई एजेंसियों ने संगठन से जुड़े 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है ।

ईडी ने संगठन के तीन अन्य पदाधिकारियों को दिल्ली से हिरासत में लिया- परवेज अहमद, मोहम्मद इलियास और अब्दुल मुकीत । साल 2018 से पीएफआई के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू होने के बाद से एजेंसी ने इन सभी से कई बार पूछताछ की है ।

क्या है पीएफआई ( PFI ) ?

पीएफआई (PFI) की स्थापना केरल में 2006 में हुई थी । साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तीन मुस्लिम संगठनों- केरल का राष्ट्रीय विकास मोर्चा, कर्नाटक फोरम फार डिग्निटी और तमिलनाडु की मनिथा नीति पासारी के विलय के बाद PFI का जन्म हुआ । बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद, दक्षिण भारत में कई संगठन सामने आए थे, जिनमें से कुछ को मिलाकर PFI का गठन किया गया था । PFI खुद को अल्पसंख्यक समुदायों, दलितों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के लोगों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध एक नव-सामाजिक आंदोलन के रूप में बताता है ।

पीएफआई ( PFI ) का दावा है कि वर्तमान में 22 राज्यों में उसकी इकाइयां है । पिछले कुछ वर्षों में PFI की अभूतपूर्व वृद्धि हुई है । PFI को एशिया के अलावा मध्य-पूर्वी देशों से भी फंडिंग मिलती है। पहले PFI का मुख्यालय कोझिकोड में था, लेकिन इसके विस्तार के बाद मुख्यालय को दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया। PFI के प्रदेश अध्यक्ष नसरुद्दीन एलमारोम संगठन के संस्थापक नेताओं में से एक है। इसके अखिल भारतीय अध्यक्ष ई अबुबकर भी केरल के रहने वाले है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here