आतंकवाद के लिए अपनी जीरो टोलेरेंस नीति पर काम करते हुए पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने UAPA के तहत पांच साल की अवधि के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसके सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है । गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है । यूएपीए एक्ट के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है । गृह मंत्रालय की ओर से इसके लिए अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है । अब इस मामले पर कई नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं ।

अक्सर पीएफआई को सिमी का ही बदला हुआ रूप कहा जाता है । दरअसल 1977 से देश में सक्रिय सिमी पर 2006 में प्रतिबंध लगा गया था । सिमी पर प्रतिबंध लगने के चंद महीनों बाद ही पीएफआई अस्तित्व में आया । कहा जाता है कि इस संगठन की कार्यप्रणाली भी सिमी जैसी ही है । साल 2012 से ही अलग-अलग मौकों पर इस संगठन पर कई तरह के आरोप लगते रहे है‌। कई बार इसे बैन करने की भी मांग हो चुकी है ।

कर्नाटक के डीजी और आईजीपी प्रवीण सूद ने कहा कि भारत सरकार ने पीएफआई और उसके अन्य सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है । राज्य सरकार गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी । कोई विरोध नहीं हुआ है और अगर कोई ऐसा करता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी । पुलिस अलर्ट पर है और सख्त कार्रवाई करेगी ।

PFI बैन की मांग क्यों हैं ?

PFI एक कट्टरपंथी संगठन है  । साल 2017 में NIA ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी । NIA जांच में इस संगठन के कथित रूप से हिंसक और आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के बात आई थी । NIA के डोजियर के मुताबिक यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है । यह संगठन मुस्लिमों पर धार्मिक कट्टरता थोपने और जबरन धर्मांतरण कराने का काम करता है । एनआईए ने पीएफआई पर हथियार चलाने के लिए ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगाया है । इतना ही नहीं यह संगठन युवाओं को कट्टर बनाकर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए भी उकसाता है ।

पीएफआई खुद को सामाजिक संगठन कहता है । इस संगठन ने कभी चुनाव नहीं लड़ा है। यहां तक कि इस संगठन के सदस्यों का रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता है । इस वजह से किसी अपराध में इस संगठन का नाम आता है, तो भी कानूनी एजेंसियों के लिए इस संगठन पर नकेल कसना मुश्किल होता है । 21 जून 2009 को सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के नाम से एक राजनीतिक संगठन बना । इस संगठन को पीएफआई से जुड़ा बताया गया है । कहा गया कि एसडीपीआई के लिए जमीन पर जो कार्यकर्ता काम करते थे वो पीएफआई से जुड़े लोग ही थे । 13 अप्रैल 2010 को चुनाव आयोग ने इसे रजिस्टर्ड पार्टी का दर्जा दिया ।

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने PFI पर कहा- कार्रवाई जनहित में की गई है

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा कि देश के हित में जो उचित है वही किया गया है । देश की सुरक्षा का मामला है । देश में सभी लोगों की मांग है कि अराजक तत्व कोई भी हो उनसे देश को बचाया जाए । जो भी कार्रवाई की गई है वो जनहित में की गई है । वो स्वागत योग्य है ।

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने PFI पर कहा ये बात

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि देश के बाहर बैठे दुश्मनों से देश के अंदर बैठे दुश्मन ज्यादा खतरनाक हैं। PM मोदी ने PFI पर प्रतिबंध लगाकर देश को सुरक्षित रखने का काम किया है । PM द्वारा जो देश का शुद्धीकरण अभियान चलाया जा रहा है, हर भारतवासी उनके साथ है ।

PFI पर सीएम योगी बोले- ये है नया भारत

पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर खुशी जताई है । उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसके अनुषांगिक संगठनों पर लगाया गया प्रतिबंध सराहनीय एवं स्वागत योग्य है । यह ” नया भारत ” है, यहां आतंकी, आपराधिक और राष्ट्र की एकता व अखंडता तथा सुरक्षा के लिए खतरा बने संगठन एवं व्यक्ति स्वीकार्य नहीं ।

PFI बैन पर सीएम योगी

PFI पर समाज विरोधी और देश विरोधी गतिविधियां करने का आरोप

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई का गठन 17 फरवरी 2007 को हुआ था । ये संगठन दक्षिण भारत के तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था । इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे । पीएफआई का दावा है कि इस वक्त देश के 23 राज्यों यह संगठन सक्रिय है । देश में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट यानी सिमी पर बैन लगने के बाद पीएफआई का विस्तार तेजी से हुआ है । कर्नाटक, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में इस संगठन की काफी पकड़ बताई जाती है । इसकी कई शाखाएं भी है । गठन के बाद से ही पीएफआई पर समाज विरोधी और देश विरोधी गतिविधियां करने के आरोप लगते रहते है ।

पिछले साल फरवरी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PFI और इसकी स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के पांच सदस्यों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दायर की थी । ED की जांच में पता चला था कि PFI का राष्ट्रीय महासचिव के ए रऊफ गल्फ देशों में बिजनेस डील की आड़ में पीएफआई के लिए फंड इकट्ठा करता था । ये पैसे अलग-अलग जरिए से पीएफआई और CFI से जुड़े लोगों तक पहुंचाए गए ।

जांच एजेंसी के मुताबिक लगभग 1.36 करोड़ रुपये की रकम आपराधिक तरीकों से प्राप्त की गई । इसका एक हिस्सा भारत में पीएफआई और सीएफआई की अवैध गतिविधियों के संचालन में खर्च किया गया । सीएए के खिलाफ होने प्रदर्शन, दिल्ली में 2020 में हुए दंगों में भी इस पैसे के इस्तेमाल की बात सामने आई थी । पीएफआई द्वारा 2013 के बाद पैसे ट्रांसफर और कैश डिपॉजिट करने की गतिविधियां तेजी से बढ़ी है । जांच एजेंसी का कहना है कि भारत में पीएफआई तक हवाला के जरिए पैसा आता है ।

 

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