6 सितंबर यानी आज ” भारत जोड़ो यात्रा ” में सोनिया गांधी ने हिस्सा लिया । उन्होंने कर्नाटक में मंड्या जिले के पांडवपुरा नगरपालिका क्षेत्र से ये यात्रा शुरू की । इस दौरान भारत जोड़ो यात्रा का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता उनके साथ मौजूद रहे । उनका कहना है कि सोनिया गांधी दो घंटे तक भारत जोड़ो यात्रा में शामिल रहीं ।

कांग्रेस की तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुई यात्रा अभी कर्नाटक में चल रही है । 2 दिन के रेस्ट के बाद आज 29वें दिन कर्नाटक के मांड्या जिले के बेल्लार से शुरू हो गई है, जिसमें कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शामिल हुई है । लंबे समय बाद सोनिया गांधी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग ले रही है । भारत जोड़ो यात्रा शुरू होने के बाद से ही सोनिया गांधी के शामिल होने को लेकर सवाल किया जा रहा था, जो लगभग इस यात्रा के एक महीने होने पूरे होने पर शामिल हुई ।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने ट्विटर पर बताया कि तय शेड्यूल के तहत सोनिया गांधी को 30 मिनट तक यात्रा करनी थी । लेकिन वो दो घंटे तक चलती रही । जयराम रमेश के मुताबिक इन दो घंटों में सोनिया गांधी ने पदयात्रियों के साथ जक्कानाहल्ली और कराड्य इलाकों के बीच यात्रा की ।

भारत जोड़ो यात्रा कर्नाटक में है, ऐसे में प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता इसमें शामिल है । गुरुवार को सोनिया गांधी भी यात्रा के लिए कर्नाटक पहुंचीं तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार और राज्य के पूर्व सीएम सिद्धारमैया उनके साथ चलते दिखाई दिए ।

सुत्रो के मुताबिक अगस्त 2016 के बाद ये पहली बार है जब सोनिया गांधी कांग्रेस से जुड़े किसी पब्लिक इवेंट में शामिल हुई है ।

यात्रा के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब राहुल गांधी अपनी मां की मदद करते दिखे । पैदल चलते हुए सोनिया गांधी के जूते का फीता खुल गया था । ये देख राहुल गांधी बीच सड़क पर झुके और अपनी मां के जूते का फीता कसने लगे । कांग्रेस नेता इस तस्वीर को काफी शेयर कर रहे है ।

भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के एक महीने बाद क्यों पहुंची सोनिया गांधी ?

कांग्रेस की तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुई यात्रा अभी कर्नाटक में चल रही है । 2 दिन के रेस्ट के बाद आज 29वें दिन कर्नाटक के मांड्या जिले के बेल्लार से शुरू हो गई है, जिसमें कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी भी शामिल हुई है । लंबे समय बाद सोनिया गांधी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग ले रही है । भारत जोड़ो यात्रा शुरू होने के बाद से ही सोनिया गांधी के शामिल होने को लेकर सवाल किया जा रहा था, जो लगभग इस यात्रा के एक महीने होने पूरे होने पर शामिल हुई ।

सोनिया गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से चुनावी अभियानों और रैलियों में कम ही दिखाई देती है । आखिरी बार उन्होंने अगस्त 2016 में वाराणसी में एक रोडशो में हिस्सा लिया था, जहां उन्हें कंधे पर चोट आई थी और बाद में उनकी सर्जरी भी हुई थी । इसके बाद से ही वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम ही हिस्सा ले रही है ।

इस साल भी दो बार कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुकी हैं । उन्हें अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ा था । हालांकि, भारत जोड़ो यात्रा के एक महीने पूरे हो जाने के मौके पर सोनिया गांधी ने एक बार फिर रैली में हिस्सा लेने का फैसला किया ।

 

सोनिया गांधी की एंट्री से कांग्रेस को क्या फायदा हो सकता है?

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में सोनिया गांधी की एंट्री की टाइमिंग भी काफी अहम है । वे एक महीने बाद कर्नाटक में यात्रा से जुड़ी हैं, जहां 2023 यानी अगले साल के मध्य में चुनाव होने है । इससे पहले कांग्रेस ने यात्रा में जिन दो राज्यों- तमिलनाडु और केरल में यात्रा निकाली, वहां 2019 और 2021 में ही चुनाव संपन्न हो चुके है । इस लिहाज से दक्षिण के किसी राज्य में कांग्रेस को अब सबसे पहले कर्नाटक में ही चुनाव में उतरना है । यहां उसे भाजपा का सामना करना है ।

सोनिया गांधी के भारत जोड़ो यात्रा में आने के सियासी मायने 

कांग्रेस के लिए कर्नाटक चुनाव अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने का अहम अवसर साबित हो सकता है । राहुल गांधी की यात्रा में सोनिया गांधी के आने से कांग्रेस के लिए इस राज्य की महत्ता भी बढ़ाने का काम किया है । गुरुवार को ही कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार समेत सभी बड़े नेता इस यात्रा में मौजूद रहे । ऐसे में कांग्रेस इस अहम राज्य में चुनाव से पहले सभी नेताओं की एकजुटता दिखाते हुए भाजपा के लिए चुनौती पेश करने की कोशिश में है ।

कर्नाटक में राहुल की यात्रा 21 दिन रहेगी। कर्नाटक में भारत जोड़ो यात्रा 511 किलोमीटर लंबी होगी । इस यात्रा के जरिए राज्य में दो धड़ों में बिखरी पार्टी को एकजुट करने की कोशिश भी है । कर्नाटक कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच खींचतान जारी है ।

इन दोनों नेताओं के समर्थन वाले धड़ों के बीच जंग कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल यहां हुए दो विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी कांग्रेस को कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी । भाजपा ने यहां दो में से एक विधानसभा सीट हासिल की थी । वहीं, बेलगावी लोकसभा सीट को बचाने में भी सफलता हासिल की थी । इस सीट पर कांग्रेस को महज कुछ हजार वोटों से हार मिली थी । जबकि पहले इस सीट पर भाजपा की हार लगभग तय मानी जा रही थी । कांग्रेस में इस करीबी हार की वजह इन दो बड़े नेताओं के बीच बंटे हुए धड़ों को माना जा रहा था, जो कि चुनाव के दौरान भी साथ नहीं आए ।

गांधी परिवार जब भी मुश्किल में होता है, तब वह दक्षिण भारत का रुख करता है । फिर चाहे वह कर्नाटक के चिकमगलूर और आंध्र प्रदेश के मेडक से लड़ने वाली इंदिरा गांधी हों, कर्नाटक के बेल्लारी से लड़ने वाली सोनिया गांधी हों या केरल के वायनाड से लड़ने वाले राहुल गांधी । कांग्रेस के अधिकतर वापसी के मौके दक्षिण से ही उपजे है । मजेदार बात यह है कि इन सभी सीटों से गांधी परिवार तभी खड़ा हुआ है, जब उसकी परांपरागत सीटों पर हार का खतरा पैदा हुआ है ।

इसी लिहाज से सोनिया गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में एंट्री कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम कर सकती है । उत्तर भारत के मुकाबले पार्टी यहां ज्यादा मजबूत रही है । रिपोर्ट्स की मानें तो उत्तर भारत के मुकाबले दक्षिण में कांग्रेस महिला वोट बैंक का फायदा भी भाजपा से ज्यादा बेहतर तरीके से उठा सकती है । इसलिए वह सोनिया के साथ प्रियंका को भी भारत जोड़ो यात्रा में भेजेगी ।

माना जा रहा है कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी कर्नाटक पहुंचकर पार्टी को एकजुट करने की कोशिश करेंगी । बीते दिनों में कर्नाटक कांग्रेस ने भी अपने स्तर पर राज्य की भाजपा सरकार को घेरने के लिए कई अभियान चलाए है ।

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